Height In Space: यह बात सुनने में साइंस फिक्शन जैसी लग सकती है लेकिन यह एक साबित किया हुआ साइंटिफिक फैक्ट है कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट लंबे हो जाते हैं. नासा के मुताबिक अंतरिक्ष में जाने के कुछ ही दिनों के अंदर एस्ट्रोनॉट की हाइट 3% तक बढ़ सकती है. यह बदलाव हड्डियों के बढ़ने या फिर जेनेटिक्स की वजह से नहीं होता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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माइक्रोग्रैविटी रीढ़ की हड्डी से दबाव हटा देती है 

पृथ्वी पर ग्रेविटी लगातार हमारे शरीर को नीचे की तरफ खींचती है. यह फोर्स पूरा दिन रीढ़ की हड्डी को दबाती है. लेकिन अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट माइक्रोग्रैविटी में रहते हैं. यहां नीचे की तरफ लगने वाला फोर्स लगभग नहीं होता. शरीर पर ग्रेविटी का दबाव न होने की वजह से रीढ़ की हड्डी दबती नहीं है. इस वजह से वह फैलने लगती है और इसी से हाइट बढ़ाने की शुरुआत होती है. 

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रीढ़ की हड्डी की डिस्क फैलती है 

रीढ़ की हड्डी में हर वर्टेब्रा के बीच मुलायम, जैल जैसी डिस्क होती है. यह शॉक एब्जॉर्बर का काम करती है. पृथ्वी पर यह डिस्क ग्रेविटी से दबी रहती है. अंतरिक्ष में यह दबाव हट जाता है जिस वजह से वह फैलती हैं. यह फैलाव हड्डी में एक्स्ट्रा लंबाई को जोड़ता है जिसका सीधा नतीजा यह होता है कि एस्ट्रोनॉट लंबे हो जाते हैं. 

यह असर टेम्पररी है परमानेंट नहीं 

भले ही यह कितना भी अजीब लगे लेकिन हाइट में यह बढ़ोतरी सिर्फ कुछ वक्त के लिए होती है. जैसे ही एस्ट्रोनॉट वापस धरती पर लौटते हैं ग्रेविटी फिर से रीढ़ की हड्डी को दबाना शुरू कर देती है. कुछ दिन या फिर कभी-कभी हफ्तों के अंदर हड्डी अपने सामान्य आकार और साइज में लौट आती है और एस्ट्रोनॉट अपनी ओरिजिनल हाइट पर वापस आ जाते हैं.

एस्ट्रोनॉट को अक्सर पीठ दर्द क्यों होता है 

लगभग 77% एस्ट्रोनॉट अपने मिशन के दौरान पीठ दर्द से जूझते हैं. रीढ़ की हड्डी और आसपास की मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से बेचैनी, अकड़न और दर्द होता है. इसके अलावा हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों का इस्तेमाल अंतरिक्ष में काफी कम होता है. इस वजह से मांसपेशियों में कमजोरी आती है और स्टडीज से ऐसा पता भी चला है कि लंबे समय के मिशन के दौरान पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में 19% तक की कमी आ जाती है.

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