Rules for reading religious texts: धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय उनके प्रति सम्मान की भावना रखना तमाम धर्मों में अहम माना गया है. ग्रंथ केवल ज्ञान का स्त्रोत ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का भी प्रतीक है.

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धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से हमारी समझ और ध्यान में इजाफा होता है. अक्सर कई लोग धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय पेन या हाईलाइट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि महत्वपूर्ण अंशों को याद रखा जा सके और भविष्य में आसानी से देख सकें. 

यह तरीका आधुनिक पद्धति में सही तो माना जाता है, लेकिन धार्मिक लिहाज से ऐसा करना गलत है. कथावाचक शिवम साधक महाराज के अनुसार धार्मिक ग्रंथों पर पेन या पेंसिल से हाईलाइट करना सही नहीं है. जानिए उन्होंने इस विषय में क्या कहा?

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कथावाचक शिवम साधक महाराज ने क्या कहा?

कथावाचक शिवम साधक के अनुसार, 'शास्त्रों या श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन करते समय अक्सर अच्छे श्लोकों को हाईलाइट कर देते हैं. लेकिन ग्रंथों पर पेन चलाने चलाने का मतलब है श्री कृष्ण पर पेन चलाना.

अनेक कथाओं में हमें ऐसा मिलता है कि किसी भक्त ने गलती से अगर ग्रंथ पर पेन चलाया तो ठाकुर जी के हृदय पर अथवा मुख पर पेन चल गया. तो कभी भी हमें ग्रंथ पर पेन नहीं चलाना चाहिए.'

उन्होंने आगे कहा कि, 'वह ग्रंथ क्या है या श्रीमद भगवत गीता क्या है? श्री कृष्ण ही हैं, क्योंकि कृष्ण के मुखारविंद से प्रत्येक शब्द निकला है तो उस पर अगर कोई लाइन आप खींच रहे हैं तो निश्चित ही श्री कृष्ण के मुखारविंद अथवा हृदय पर आप लाइन खींच रहे हैं. यह बहुत बड़ा दोष आपको लग सकता है.

मन में उतारिए, कोई अच्छी बात लग रही है, जीवन पर उतारिए. भूलने का भय है तो किसी दूसरे कागज पर उतार लीजिए लेकिन ग्रंथ पर कभी भूलकर पेन नहीं चलाइए.'

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.