Earthquake: सौरमंडल में पृथ्वी एकमात्र ऐसी जगह नहीं है जहां पर भूकंप आते हैं. वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि कई ग्रह और चंद्रमा पर भी भूकंप जैसी हलचल होती है. हालांकि इसकी वजह पृथ्वी पर होने वाले भूकंप से अलग होती है. इन झटकों को सामूहिक रूप से प्लेनेटक्वेक या फिर भूकंपीय गतिविधि कहा जाता है. 

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दूसरे ग्रहों पर होने वाले भूकंप को क्या कहते हैं? 

वैज्ञानिक भूकंपीय गतिविधि के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करते हैं. यह इस बात पर निर्भर होता है कि वह किस खगोलीय पिंड पर हो रही है. मंगल पर इन झटकों को मार्सक्वेक कहा जाता है. चंद्रमा पर इन्हें मूनक्वेक के नाम से जाना जाता है. शुक्र पर होने वाली इन घटनाओं को वीनसक्वेक कहा जाता है और सूर्य पर होने वाले इस हलचल से जुड़ी कंपन को सनक्वेक कहते हैं. 

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दूसरे ग्रहों पर क्यों आते हैं भूकंप? 

पृथ्वी के उलट जहां ज्यादातर भूकंप टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से आते हैं दूसरे ग्रहों और चंद्रमाओं पर झटका अलग-अलग वैज्ञानिक वजहों से आते हैं. एक मुख्य वजह है ग्रहों का ठंडा होना और सिकुड़ना. जैसे-जैसे मंगल और मंगल जैसे ग्रह अरबों सालों में धीरे-धीरे ठंडे होते हैं उनका अंदरूनी हिस्सा सिकुड़ता है. इस सिकुड़न से बाहरी परत पर दबाव पड़ता है. इसके बाद दरारें पड़ती हैं और भूकंपीय गतिविधि शुरू हो जाती है.

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गुरुत्वाकर्षण भी भूकंप की वजह 

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की वजह से चंद्रमा पर अक्सर मूनक्वेक आता है. यह लगातार लगने वाला एक टाइडल फोर्स है जो चंद्रमा के अंदरूनी हिस्से को खींचता और सिकोड़ता है. इससे उसकी चट्टानी संरचना में तनाव पैदा होता है. जब यह तनाव रिलीज होता है तो भूकंप आता है. 

उल्कापिंडों की टक्कर 

ग्रहों पर भूकंप का एक और सबसे बड़ा कारण उल्कापिंडों की टक्कर है. जब अंतरिक्ष की बड़ी चट्टान काफी तेज रफ्तार से किसी ग्रह या फिर चंद्रमा से टकराती हैं तो वह भारी मात्रा में ऊर्जा छोड़ती हैं. इस टक्कर से शॉक वेव पैदा होती है जो सतह से होकर गुजरती है और भूकंप की तरह जबरदस्त कंपन पैदा करती है.

इसी के साथ कुछ ग्रह और चंद्रमा पर जमीन के नीचे ज्वालामुखी की गतिविधि भूकंप की वजह बन सकती है. सतह के नीचे पिघलती हुई चट्टान की हलचल से दबाव बनता है जो आसपास की चट्टान की परतों को तोड़ सकता है. इससे झटके महसूस होते हैं.

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