गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद केंद्रिय औधोगिक सुरक्षा बल CISF 1 नवंबर से अपनी प्रशासनिक और ऑपरेशनल व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है. अब तक भौगोलिक सीमाओें और क्षेत्रों के आधार पर संचालित होने वाला सुरक्षा बल पहली बार क्षेत्रों की विशिष्ट जरूरतों के हिसाब से काम करेगा. इसका मतलब है कि देश के किसी भी कोने में मौजूद एक ही तरह के महत्वपूर्ण संस्थान अब किसी एक विशिष्ट कमान के अधीन होंगे. इस बड़े बदलाव के बीच आज यह जानना जरूरी है कि ताजमहल से लेकर देश के व्यस्ततम हवाई अड्डों तक, CISF के जवान वर्तमान में कहां-कहां देश की सुरक्षा की ढाल बने हुए हैं.
ऐतिहासिक स्मारक, संग्रहालय और संसद भवन की सुरक्षा
देश के गौरव और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा में CISF की भूमिका सबसे अग्रणी मानी जाती है. दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र आगरा का ताजमहल हो या फिर राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला, इन सभी प्रतिष्ठित स्मारकों की सुरक्षा की कमान CISF के पास ही है.
नए बदलावों के तहत अब दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR को पुनर्गठित किया गया है. इसे अब सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक और मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम सेक्टर का नाम दिया गया है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में ही बनाया गया है. इसके अलावा देश के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील समझे जाने वाले संसद भवन परिसर की सुरक्षा का जिम्मा भी CISF के कंधों पर है.
देश के प्रमुख हवाई अड्डे और मेट्रो नेटवर्क
आधुनिक शहरी यातायात और विमानन सुरक्षा को बनाए रखने में इस सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान है. वर्तमान में CISF देश के करीब 72 से अधिक नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा से लेकर यात्रियों की जांच और एक्सेस कंट्रोल तक का पूरा काम इसी बल के जवान करते हैं.
1 नवंबर से लागू होने वाले बदलावों के तहत दिल्ली और बेंगलुरु स्थित एयरपोर्ट-1 और एयरपोर्ट-2 के विशेष प्रबंधों को और अधिक सुद्दढ़ बनाकर पहले की तरह ही जारी रखा जाएगा. हवाई अड्डों के साथ-साथ दिल्ली मेट्रो जैसी भारी भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील शहरी रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इसी बल के पास है.
बंदरगाहों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा
देश के समुद्री व्यापारिक बुनियादी ढांचे और विशाल बंदरगाहों को किसी भी बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने के लिए इस पुनर्गठन में विशेष ध्यान दिया गया है. समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की सुरक्षा को नया रूप देने के लिए पहले के भौगोलिक वेस्टर्न सेक्टर मुंबई और साउथ सेक्टर चेन्नई को पूरी तरह से बदल दिया गया है.
1 नवंबर से इन्हें वेस्ट कोस्ट पोर्ट और ईस्ट कोस्ट पोर्ट के नए नाम और नई शक्तियों के साथ संचालित किया जाएगा. इससे भारत के सभी प्रमुख बंदरगाह और सीपोर्ट सीधे तौर पर समुद्री सुरक्षा और खतरे की प्रकृति को समझने वाले विशेष कमांडरों की देखरेख में आ जाएंगे.
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ऊर्जा, अंतरिक्ष, कोयला और स्टील जैसे मुख्य औद्योगिक क्षेत्र
CISF का गठन मूल रूप से देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए ही वर्ष 1969 में किया गया था. आज के समय में यह बल भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसे परमाणु ऊर्जा केंद्रों, ISRO के अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों, बड़े बिजली ग्रिड़ों, तेल और प्राकृतिक गैस रिफाइनरियों को सुरक्षा कवच प्रदान करता है.
इन क्षेत्रों में तकनीक विशेषज्ञता और सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए रांची में कोयला सेक्टर, भिलाई में स्टील सेक्टर, गुवाहाटी में पेट्रोलियम गैस सेक्टर और नई दिल्ली व कोलकाता में पावर सेक्टर के लिए पूरी तरह समर्पित फंक्शनल कमांड स्थापित किए गए हैं. ये सभी नए सुरक्षा कमांड 1 नवंबर से पूरी तरह एक्टिव होकर काम करना शुरू कर देंगे.
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