दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक, भारत को चलाने के लिए हर साल लाखों करोड़ रुपयों की जरूरत होती है. सड़कों का जाल बिछाना हो, सेना को आधुनिक बनाना हो या करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन देना- इन सब के लिए पैसा कहां से आता है? अक्सर हम सालाना बजट की बात करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत सरकार एक दिन में कितना कमाती है? सरकारी आंकड़ों और बजट अनुमानों के आधार पर सरकार की रोज की कमाई का आंकड़ा किसी को भी हैरान कर सकता है, चलिए जानें. 

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बजट 2024-25 और सरकारी आय के अनुमान

भारत सरकार के केंद्रीय बजट 2024-25 के अनुमानों के मुताबिक, सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियां लगभग 31,29,200 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. यदि हम इसमें उधारी को छोड़ दें और केवल गैर-ऋण प्राप्तियों की बात करें, तो यह आंकड़ा लगभग 32,07,200 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. इस भारी-भरकम रकम को जब हम साल के 365 दिनों में बांटते हैं, तो सरकार की रोजाना की औसत कमाई का एक दिलचस्प खाका सामने आता है जो देश की आर्थिक ताकत को दर्शाता है.

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एक दिन में सरकार की झोली में कितना पैसा?

गणित के हिसाब से देखें तो केंद्र सरकार हर दिन लगभग 878.68 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई (बिना उधारी के) करती है. यह वह पैसा है जो सरकार को विभिन्न टैक्स और अन्य स्रोतों से प्राप्त होता है और जिसे वापस नहीं करना पड़ता है. इसमें राज्यों को दिया जाने वाला हिस्सा घटाने के बाद केंद्र के पास बचने वाली शुद्ध राशि शामिल है. यह रोज की कमाई ही देश के प्रशासनिक खर्चों, कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का मुख्य आधार बनती है.

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कमाई का सबसे बड़ा जरिया

सरकार की रोजाना की कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है. बजट अनुमानों के अनुसार, शुद्ध कर राजस्व (Net Tax Revenue) के रूप में सरकार को हर दिन करीब 707.8 करोड़ रुपये मिलते हैं. इसमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और जीएसटी (GST) जैसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं. देश के करोड़ों नागरिक और कंपनियां जो टैक्स चुकाते हैं, वही हर सुबह सरकारी खजाने को करोड़ों रुपयों से भर देता है. जीएसटी के आने के बाद से टैक्स वसूली में काफी स्थिरता और बढ़ोत्तरी देखी गई है.

बिना टैक्स वाली कमाई का हिस्सा

केवल टैक्स ही नहीं, सरकार के पास कमाई के अन्य स्रोत भी हैं जिन्हें गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) कहा जाता है. इसमें सरकारी कंपनियों से मिलने वाला लाभांश (Dividends), आरबीआई से मिलने वाला सरप्लस, विभिन्न सेवाओं के लिए ली जाने वाली फीस और कर्ज पर मिलने वाला ब्याज शामिल है. इस माध्यम से सरकार को हर दिन लगभग 149.5 करोड़ रुपये की आय होती है. रेलवे, बैंकिंग और विनिवेश जैसे क्षेत्रों से आने वाला पैसा इसी श्रेणी में आता है, जो सरकारी खजाने को मजबूती देता है.

खर्च और कमाई के बीच का संतुलन

हालांकि 878 करोड़ रुपये रोज की कमाई सुनने में बहुत बड़ी लगती है, लेकिन सरकार के खर्च इससे कहीं ज्यादा हैं. बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और रक्षा पर होने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए अक्सर सरकार को बाजार से उधारी लेनी पड़ती है. जिसे हम 'राजकोषीय घाटा' कहते हैं. सरकार की कोशिश रहती है कि टैक्स चोरी को रोककर और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देकर अपनी इस रोज की शुद्ध कमाई को बढ़ाया जाए, ताकि उधारी पर निर्भरता कम हो सके और देश आत्मनिर्भर बन सके.

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