सोचिए, देश की असली तस्वीर सामने आने वाली है- हर घर, हर व्यक्ति और हर गांव का डेटा पहली बार डिजिटल तरीके से दर्ज किया जाएगा. 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही इस जनगणना में न सिर्फ हमारी जनसंख्या का सही आंकड़ा मिलेगा, बल्कि यह बताएगा कि कौन से राज्य, कौन से जिले और कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा आबादी वाले हैं. सरकारी योजनाओं, संसदीय सीटों और प्रतिनिधित्व की रीढ़ इसी डेटा पर निर्भर करेगी. क्या यह भारत की भविष्य की राजनीति और विकास का नक्शा बदल देगा?

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जनगणना 2027 का महत्व

भारत सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से देश की सबसे बड़ी जनगणना शुरू होगी. यह 16वीं जनगणना होगी, जिसकी शुरुआत 1872 से होती आई है. इस बार यह पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें लगभग 3 मिलियन एंयूरेटर मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा इकट्ठा करेंगे. डेटा कलेक्शन Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऐप से होगा. 15 दिन का सेल्फ-एंयूरेशन विकल्प भी रखा गया है, जिससे लोग खुद से जानकारी दर्ज कर सकते हैं.

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अर्थशास्त्र और जनगणना का जुड़ाव

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 2025-26 के लिए GDP का पहला अनुमान प्रकाशित किया. यह संयोग इस जनगणना के साथ जरूरी है, क्योंकि अर्थव्यवस्था की वृद्धि का असली उद्देश्य लोगों की भलाई सुनिश्चित करना है. जनगणना के आंकड़े इस बात का सटीक संकेत देंगे कि सरकारी योजनाएं और नीतियां किस स्तर तक प्रभावी रही हैं और उन्हें कहां सुधार की जरूरत है. 

राजनीतिक महत्व

जनगणना केवल आबादी गिनने का काम नहीं है. इसका इस्तेमाल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के परिसरों के पुन:निर्धारण में भी होगा. दक्षिण और पश्चिमी राज्यों ने जन्म दर नियंत्रण में सफलता पाई है, जबकि उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्य जनसंख्या में तेजी से बढ़ रहे हैं. इस नए आंकड़े के आधार पर संसदीय सीटों का वितरण बदल सकता है, जिससे राजनीतिक शक्ति का संतुलन प्रभावित हो सकता है.

जनगणना 2027 में किन चीजों पर होगा ज्यादा फोकस

Census 2027 घर, भाषा, धर्म, शिक्षा, व्यापार गतिविधियों, प्रवास और जन्म दर जैसी जानकारी प्रदान करेगा. यह डेटा गांव, शहर और वार्ड स्तर तक उपलब्ध होगा. इससे न केवल योजनाओं के लाभार्थी सही तरह से तय होंगे, बल्कि नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णय भी अधिक प्रभावी होंगे. 

उम्मीद और चुनौतियां

इस जनगणना से भारत के नागरिकों की सटीक जानकारी मिलेगी और नीतियों की प्रभावशीलता बढ़ेगी. हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चुनौती यह होगी कि डेटा का सही इस्तेमाल हो और सभी वर्गों तक योजनाएं पहुंचे.

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