Diamond Licking Myth: यह विचार की हीरे को चाटने से तुरंत मौत हो सकती है सदियों से चला आ रहा है. इसे अक्सर चेतावनी के तौर पर दोहराया जाता है. लेकिन जब आधुनिक विज्ञान की नजर से इसे देखा जाता है तो पता चलता है कि यह दावा पूरी तरह से गलत है. सच्चाई काफी कम नाटकीय और कहीं ज्यादा तार्किक है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.
हीरे बिल्कुल भी जहरीले नहीं होते
वैज्ञानिक रूप से कहें तो हीरा लगभग 99.95% शुद्ध कार्बन से बना होता है. कार्बन एक मूल तत्व है जो मानव शरीर में और रोजमर्रा की चीजों जैसे कि भोजन और हवा में पाया जाता है. हीरे रासायनिक रूप से भी निष्क्रिय होते हैं. यानी कि वे शरीर के तरल पदार्थ, एसिड या फिर एंजाइम के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं. यही वजह है कि हीरा सिर्फ छूने या फिर चाटने से जहर नहीं फैला सकता.
सबसे कठोर पदार्थ
हीरे को चाटना बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा. लेकिन इसे निगल लेना एक बिल्कुल अलग मामला है. हीरे सबसे कठोर ज्ञात प्राकृतिक पदार्थ हैं. उनके किनारे अक्सर नुकीले और काटने वाले होते हैं. अगर हीरे को निगल लिया जाए तो हीरा अंदरूनी टिशूज को फाड़ सकता है. इससे आंतों में छेद और अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है.
अंदरूनी चोट और रुकावट
निगला हुआ हीरा खासकर बड़ा हीरा आंतों में रुकावट भी पैदा कर सकता है. अगर इसका तुरंत इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है. यहां खतरा यांत्रिक चोट का है ना की रासायनिक नुकसान का.
इतिहास में यह मिथक कैसे शुरू हुआ?
हीरे चाटने के बारे में ज्यादातर डर ऐतिहासिक कहानियों से आता है. शाही दरबार में खासकर प्राचीन भारत में ऐसा कहा जाता था कि कुछ रानियां आक्रमणों या फिर हार के दौरान आपातकालीन आत्म नुकसान के लिए गहनों में जहर छुपा कर रखती थी. हीरे जड़ी अंगूठियों में यह आम था. समय के साथ यह संबंध इस विश्वास में बदल गया कि हीरा खुद जानलेवा था.
हीरों पर केमिकल्स
एक प्रैक्टिकल बात यह है कि कच्चे या फिर नए कटे हुए हीरों पर माइनिंग, कटिंग या पॉलिशिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए केमिकल्स के निशान हो सकते हैं. बिना धोए हीरे को चाटने से कोई इन बचे हुए केमिकल्स के संपर्क में आ सकता है जिससे हल्की जलन हो सकती है. लेकिन इसके बाद भी इसका हीरे से कोई लेना-देना नहीं है और इससे मौत बिल्कुल नहीं होगी.
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