Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 19वां दिन है. उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई जवाब नहीं देती तब तक वे अपना अनशन जारी रखेंगे. इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है. इस याचिका में मेडिकल मदद की मांग की गई है जिसमें जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती करना और जबरदस्ती खाना खिलाना शामिल है. इन घटनाक्रमों के बीच आइए जानते हैं कि सोनम वांगचुक को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार क्यों दिया गया और उन्होंने कौन-कौन सी इनोवेशंस की हैं.

Continues below advertisement

सोनम वांगचुक को क्यों मिला यह पुरस्कार?

सोनम वांगचुक को 2018 में लद्दाख में शिक्षा में बदलाव लाने, टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने और स्थानीय पर्यावरणीय चुनौतियों को हल करने के लिए विज्ञान आधारित इनोवेशन का इस्तेमाल करने के उनके काम के लिए यह पुरस्कार दिया गया था. रेमन मैग्सेसे पुरस्कार फाउंडेशन ने हिमालयी क्षेत्र के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की उनकी कोशिश को मान्यता दी. 

Continues below advertisement

उन्होंने शैक्षिक सुधार और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के जरिए लद्दाख में सार्थक सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने के लिए वांगचुक की तारीफ की. वांगचुक का काम दूर दराज के इलाकों में छात्रों के सीखने के नतीजे को बेहतर बनाने, रटने के बजाय व्यवहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने और पानी के संरक्षण के साथ ऊर्जा दक्षता के लिए जलवायु अनुकूल समाधान विकसित करने पर केंद्रित था.

आइस स्तूप

आइस स्तूप सोनम वांगचुक का सबसे मशहूर आविष्कार है और इसे दुनिया भर में पहचान मिली है. लद्दाख में वसंत ऋतु में खेती के मौसम के दौरान पानी की काफी ज्यादा कमी रहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि सर्दियों में पिघलने वाले ग्लेशियर का ज्यादातर पानी फसलों की सिंचाई की जरूरत पड़ने से पहले ही बह जाता है. इस समस्या को हल करने के लिए वांगचुक ने एक तकनीक विकसित की जिसमें सर्दियों के पानी को पाइप के जरिए जमा देने वाले ठंड में स्प्रे किया जाता है. इससे कोन के आकार की बर्फ की संरचनाएं बनती हैं. अपने इस आकार के वजह से आइस स्तूप वसंत ऋतु में धीरे-धीरे पिघलते हैं और किसानों को मई और जून में सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलता है.

पैसिव सोलर हीटेड मिट्टी की इमारतें 

एक और बड़ा इनोवेशन मिट्टी, पुआल और स्थानीय रूप से मौजूद सामग्री का इस्तेमाल करके पैसिव सोलर हीटेड इमारत का निर्माण है. ये इमारत दिन के समय सूरज की रोशनी से गर्मी सोखती हैं और रात भर उसे बनाए रखती हैं. इससे बाहर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरने पर भी घर के अंदर का तापमान आरामदायक बना रहता है. 

भारतीय सेना के लिए सोलर हीटेड टेंट 

2021 में वांगचुक ने लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए हल्के सोलर हीटेड टेंट बनाए थे. यह आसानी से कहीं भी ले जा सकने वाले टैंट दिन में सौर ऊर्जा को सोखते हैं और रात में गर्मी बनाए रखते हैं. इससे सैनिकों को कड़ाके की ठंड का सामना करने में मदद मिलती है और ईंधन से चलने वाले हीटिंग सिस्टम की जरूरत कम हो जाती है. 

यह भी पढ़ेंः 1947 में आजाद था बलूचिस्तान, फिर कैसे बन गया था पाकिस्तान का हिस्सा?

SECMOL की स्थापना 

1988 में सोनम वांगचुक ने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की स्थापना की. यह संस्थान शिक्षा का एक ऐसा मॉडल पेश करता है जो खुद करके सीखने, क्रिएटिविटी और प्रैक्टिकल स्किल्स पर जोर देता है. यह मुख्य रूप से उन छात्रों की मदद करता है जिन्हें पारंपरिक स्कूली परीक्षाओं में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. यह उन्हें अपने अंदर आत्मविश्वास को  फिर से पाने और असल दुनिया की काबिलियत विकसित करने में मदद करता है.

इसी के साथ 1994 में वांगचुक ने ऑपरेशन न्यू होप भी शुरू किया था. यह शिक्षा में सुधार लाने की एक पहल थी जिसका मकसद पूरे लद्दाख में सरकारी स्कूलों की स्थिति को बेहतर करना था.

यह भी पढ़ेंः जापान का महा-प्लान..80 साल बाद बनाने जा रहा खुफिया एजेंसी, जानें क्यों उठाया यह कदम?