Budget 2026: यूनियन बजट 2026-27 में यात्रियों और टेक लवर दोनों को राहत दी गई है. सबसे ज्यादा कंज्यूमर फ्रेंडली घोषणाओं में से एक है पर्सनल इंपोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% करना. यह बदलाव सीधे स्मार्टफोन जैसी महंगी चीजों पर असर डालता है. इसका अच्छा खासा असर आईफोन पर पड़ेगा जो विदेश में पहले से ही सस्ते हैं. अब इस नए नियम के बाद घर लौट रहे भारतीय यात्रियों के लिए दुबई से आईफोन को खरीदना अब और भी सस्ता हो गया है. आइए जानते हैं कि अब इंपॉर्टेंट आईफोन असल में कितना सस्ता होगा.

Continues below advertisement

दुबई में आईफोन पहले से ही सस्ता क्यों था 

बजट से पहले भी कम टैक्स और प्राइसिंग पॉलिसी की वजह से दुबई में आईफोन खासकर प्रो और प्रो मैक्स मॉडल भारत की तुलना में काफी सस्ते थे. आईफोन 17 प्रो मैक्स जैसे मॉडल दुबई में भारतीय रिटेल स्टोर की तुलना में पहले से ही लगभग 25000 से 27000 सस्ते होने का अनुमान था. नई कस्टम ड्यूटी में कटौती से यह अंतर और भी ज्यादा बढ़ गया है. 

Continues below advertisement

बजट में क्या बदलाव हुआ 

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पर्सनल इस्तेमाल के लिए भारत में लाए गए सामान पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटकर 10% कर दिया गया है. यह ड्यूटी वह आधार है जिस पर दूसरे टैक्स कैलकुलेट किए जाते हैं. इसलिए इस कम करने से कुल देय टैक्स पर असर पड़ता है. इसके अलावा इंटरनेशनल यात्रियों के लिए ड्यूटी फ्री अलाउंस को 50000 से बढ़कर 75000 कर दिया गया है. इसका मतलब है कि कस्टम ड्यूटी सिर्फ 75000 से ज्यादा की कीमत पर लगाई जाएगी. 

आईफोन पर कितनी होगी बचत

कस्टम ड्यूटी में 10% की कटौती की वजह से इंपॉर्टेंट आईफोन पर कुल टैक्स का बोझ काफी कम हो जाता है. एक हाई एंड फोन के लिए मॉडल और घोषित कीमत के आधार पर लगभग 5000 से 6000 की अतिरिक्त बचत होगी. जब इसे पहले से कम दुबई रिटेल कीमत के साथ मिलाया जाता है तो प्रीमियम आईफोन मॉडल के लिए कुल बचत आसानी से ₹30000 से ज्यादा हो सकती है.

वारंटी सबसे बड़ी दिक्कत 

एक जरूरी बात यह है कि दुबई से खरीदे गए आईफोन की भारत में वारंटी सपोर्ट लिमिटेड या फिर सिर्फ कुछ खास इलाकों के लिए हो सकती है. खरीदने से पहले या बाद में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए एप्पल की इंटरनेशनल वारंटी पॉलिसी को चेक करना काफी जरूरी है.

ये भी पढ़ें: भारत अमेरिकी की ट्रेड डील से किन देशों की लगेगी लंका, सबसे ज्यादा किसे होगा नुकसान?