BMC Election Result 2026: हाल ही में हुए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव के नतीजे आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है. दरअसल शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि उनकी पार्टी अपने उम्मीदवार को मुंबई का मेयर बनते देखना चाहती है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या चुनाव हारने के बाद भी किसी पार्टी के लिए अपने मेयर को चुनना कानूनी रूप से संभव है या नहीं.
मुंबई के मेयर का चुनाव कैसा होता है
लोकसभा या विधानसभा चुनावों के उलट मुंबई के मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता. मुंबई नगर निगम अधिनियम 1888 के तहत मेयर को चुने हुए पार्षद द्वारा अपने बीच से ही चुना जाता है. इसका मतलब है कि मेयर का चुनाव एक आंतरिक प्रक्रिया है ना की वोट.
इसी के साथ सिर्फ वही उम्मीदवार जो अपने वार्ड चुनाव जीत चुके हैं और पार्षद बन गए हैं मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने के योग्य होते हैं. अगर कोई व्यक्ति बीएमसी चुनाव हार गया है तो वह मेयर की दौड़ के लिए अपने आप ही अयोग्य हो जाता है.
संख्याओं का खेल
बीएमसी में कुल 227 सीट हैं और मेयर चुनने के लिए एक पार्टी को कम से कम 114 सीट का साधारण बहुमत हासिल करना होता है. चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने सिर्फ 65 सीट जीतीं. यह जरूरी बहुमत से काफी कम थी.
लॉटरी द्वारा आरक्षण
मेयर के पद के लिए आरक्षण प्रणाली से एक और जटिल प्रक्रिया सामने आती है. मेयर चुनाव से पहले शहरी विकास विभाग यह तय करने के लिए लॉटरी निकलता है कि पद महिलाओं, ओबीसी, एससी/एसटी के लिए आरक्षित होगा या फिर सामान्य रहेगा.
सिर्फ चुनी हुई श्रेणी के पार्षद ही नामांकन को दाखिल कर सकते हैं. भले ही किसी पार्टी के पास संख्या हो लेकिन वह ऐसे मेयर उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतार सकती जो आरक्षण मानदंडों को पूरा नहीं करता हो.
हरने वाले उम्मीदवार मेयर क्यों नहीं बन सकते
बीएमसी के नियम साफ हैं. नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति चुना हुआ पार्षद नहीं है वह मेयर नहीं बन सकता. जो भी राजनीतिक नेता अपने वार्ड चुनाव हार जाते हैं उन्हें नामांकन या फिर पिछले दरवाजे के इंतजाम से मेयर के पद पर एडजस्ट नहीं किया जा सकता. यहां तक की नॉमिनेटेड कॉर्पोरेटर भी मेयर का चुनाव नहीं लड़ सकते.
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