Bimstec 6th Summit: बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन यानि बिम्सटेक का छठा शिखर सम्मेलन बैंकॉक में 4 अप्रैल को आयोजित होने जा रहा है. इससे पहले 2 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हो चुकी है और अब आज यानि 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की बैठक होनी है. इस समारोह के लिए पीएम मोदी बैंकॉक पहुंच चुके हैं और वहां उनका शानदार स्वागत हुआ है. कल यह सम्मेलन होना है. ऐसे में जान लेते हैं कि आखिर बिम्सटेक में कौन-कौन से देश शामिल हैं और यह कितना ताकतवर संगठन है. 

बिम्सटेक के सदस्य देश

बिम्सटेक एशिया क्षेत्र में एक बहुपक्षीय संगठन है. इसके सदस्य देश हैं बांग्लादेश, भारत, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल और थाईलैंड. इसका मुख्यालय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में है. इस तरीके से बिम्सटेक साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया को जोड़ने के रूप में काम करता है. बिम्सटेक के पास अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मालदीव को छोड़ दें तो साउथ एशिया के सभी प्रमुख देशों की सदस्यता है. इसका गठन 1997 में बांग्लादेश, श्रीलंका, भारत और थाईलैंड के बीच आर्थिक सहयोग और विकास को बढ़ाने के लिहाज से किया गया था. 

बिम्सटेक का उद्देश्य

साल 2019 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक सदस्य राज्यों के नेताओं को मानद अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. बिम्सटेक का उद्देश्य साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशियाई देशों में आर्थिक रूप से तेज विकास सुनिश्चित करने के लिए माहौल तैयार करना, क्षेत्रों में समानता और भागीदारी को बढ़ाना, समान हित के देशों में गतिशील और पारस्परिक सहयोग सुनिश्चित करना है.  

कितना ताकतवर है बिम्सटेक

भारत बिम्सटेक के सबसे प्रभावशाली सदस्यों में से है. यह संगठन साउथ और साउथ ईस्ट एशिया के बीच एक पुल की भांति काम करता है. यह इन देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने का काम करता है. यह बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में हिंद और प्रशांत का केंद्र बनने की क्षमता रखता है. बिम्सटेक सार्क और आसियान देशों के बीच अंतर क्षेत्रीय सहयोग के लिए मंच प्रदान करता है. बिम्सटेक आर्थिक विकास के लिए प्रभावशाली इंजन के रूप में उभरकर सामने आया है. हर साल दुनिया के कुल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा बे ऑफ बंगाल से होकर गुजरता है, यह इस लिहाज से भी महत्वपूर्णं है. 

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