ASEAN Expansion: तीन दशक से ज्यादा का इंतजार और आखिरकार दक्षिण-पूर्व एशिया के नक्शे पर एक नया झंडा लहराया, तिमोर-लेस्ते का. कभी इंडोनेशिया का हिस्सा रहा यह छोटा-सा देश अब आसियान का 11वां सदस्य बन गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस देश की अपनी कोई करेंसी नहीं है, फिर भी इसकी मुद्रा भारत से कई गुना ज्यादा मजबूत है. आखिर कैसे? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक जुड़ाव, तिमोर-लेस्ते की अर्थव्यवस्था और भारत से इसके आर्थिक फर्क की पूरी कहानी.

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35 साल बाद हुआ आसियान का विस्तार

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ यानी ASEAN ने 1990 के दशक के बाद पहली बार अपने सदस्य देशों की संख्या बढ़ाई है. कुआलालंपुर में रविवार को हुए भव्य समारोह में तिमोर-लेस्ते को आधिकारिक तौर पर आसियान का 11वां सदस्य देश घोषित किया गया. यह ऐतिहासिक फैसला पूरे 35 साल बाद हुआ, जब किसी नए देश को इस संगठन में शामिल किया गया. 

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इस मौके पर जब मंच पर आसियान के अन्य 10 देशों के झंडों के साथ तिमोर-लेस्ते का तिरंगा फहराया गया, तो वहां मौजूद हर आंख गर्व से चमक उठी. तिमोर-लेस्ते के प्रधानमंत्री सनाना गुस्माओ ने भावुक होकर कहा, ‘आज हमने इतिहास रचा है. यह केवल सदस्यता नहीं, बल्कि हमारी आजादी और पहचान की नई मंजिल है.’

आजाद हुआ, फिर दुनिया से जुड़ा 

तिमोर-लेस्ते, जिसे East Timor भी कहा जाता है, साल 2002 में इंडोनेशिया से आजाद हुआ था. यह दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे युवा और सबसे छोटा देश माना जाता है. आबादी करीब 14 लाख है और ज्यादातर लोग खेती या मत्स्य उद्योग पर निर्भर हैं. आर्थिक रूप से यह क्षेत्र का सबसे गरीब देश है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से अब इसे एक बड़ी पहचान मिल गई है.

क्यों खास है यह सदस्यता?

आसियान (ASEAN) में शामिल होना किसी भी देश के लिए आर्थिक, राजनयिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है. इस सदस्यता से तिमोर-लेस्ते को न केवल दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों तक पहुंच मिलेगी, बल्कि पर्यटन, निवेश और व्यापार के नए रास्ते भी खुलेंगे. इसके साथ ही यह कदम क्षेत्रीय एकता और समावेशिता की दिशा में बड़ा प्रतीकात्मक संदेश भी देता है.

तिमोर-लेस्ते की करेंसी भारत से कितनी मजबूत?

अब बात करें उस सवाल की कि आखिर तिमोर-लेस्ते की करेंसी आखिर भारत से कितनी मजबूत है? दिलचस्प बात यह है कि तिमोर-लेस्ते की अपनी कोई आधिकारिक मुद्रा नहीं है. यह देश अमेरिकी डॉलर (USD) का इस्तेमाल करता है, जो उसकी राष्ट्रीय करेंसी के तौर पर मान्य है. इसका सीधा मतलब है कि वहां का एक डॉलर भारतीय रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा मूल्यवान है. वर्तमान में (अक्टूबर 2025 तक) एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 83 से 84 रुपये के बराबर है. यानी वहां की करेंसी भारत से 83 गुना ज्यादा मजबूत है.

आर्थिक स्थिति और भविष्य की उम्मीदें

हालांकि तिमोर-लेस्ते की अर्थव्यवस्था अभी सीमित है कृषि, कॉफी निर्यात और कुछ तेल संसाधनों पर निर्भर है, लेकिन आसियान की सदस्यता इसके लिए नए निवेश और विकास के दरवाजे खोल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में यह देश दक्षिण-पूर्व एशिया का उभरता हुआ छोटा आर्थिक केंद्र बन सकता है.

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