Russia Burevestnik Nuclear Missile: एक ऐसी मिसाइल जो थकती नहीं, रुकती नहीं और जिसे कोई डिफेंस सिस्टम रोक नहीं सकता है. रूस ने दुनिया को चौंका दिया है. ‘बुरेवेस्तनिक’ नाम की इस मिसाइल को अमेरिका और नाटो देश ‘स्काईफॉल’ कहते हैं. यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल है, जो हफ्तों तक आसमान में मंडरा सकती है. अब सवाल उठता है कि क्या वाकई रूस ने बना लिया है वो हथियार जो पूरी धरती की ताकतों को चुनौती दे सके? आइए समझते हैं इस मिसाइल की पूरी कहानी, इसके दावे और इसके पीछे छिपे खतरे को.

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तबाही का दूसरा नाम बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल

रूस ने हाल ही में अपनी सबसे रहस्यमय और खतरनाक मानी जाने वाली मिसाइल ‘बुरेवेस्तनिक’ का सफल परीक्षण किया है. नाटो देशों ने इसे एक नया नाम दिया है- ‘स्काईफॉल’. इस मिसाइल को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि यह मिसाइल किसी भी मौजूदा या भविष्य के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता रखती है. यह दावा जितना रोमांचक है, उतना ही डरावना भी, क्योंकि इसमें लगा है परमाणु रिएक्टर, यानी यह सिर्फ मार नहीं सकती, बल्कि गलती से गिरने पर तबाही भी मचा सकती है.

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क्या है इसकी खासियत

बुरेवेस्तनिक को साधारण मिसाइलों से अलग बनाता है इसका न्यूक्लियर इंजन. जहां सामान्य क्रूज मिसाइलें ईंधन खत्म होने पर रुक जाती हैं, वहीं यह मिसाइल ‘असीमित रेंज’ रखती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हफ्तों या महीनों तक उड़ान भर सकती है और लगभग 20,000 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है. हाल के परीक्षणों में यह करीब 14,000 किलोमीटर तक उड़ चुकी है.

इसका नाम ‘बुरेवेस्तनिक’ रूसी भाषा के एक शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब होता है ‘तूफानी पक्षी’. रूसियों का कहना है कि जैसे यह पक्षी आने वाले तूफान की आहट देता है, वैसे ही यह मिसाइल भी दुश्मन देशों के लिए आने वाले खतरे की निशानी है. 

इसको पकड़ना है नामुमकिन

आकार की बात करें तो यह मिसाइल लगभग 7 से 8 मीटर लंबी है और इसकी स्पीड करीब 1300 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है. यह बेहद कम ऊंचाई यानी सिर्फ 50 से 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकती है, जिससे रडार को पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है. इसीलिए रूस का दावा है कि यह किसी भी अमेरिकी या नाटो मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे THAAD या Aegis को आसानी से मात दे सकती है.

कितनी खतरनाक है मिसाइल

लेकिन इस मिसाइल का सबसे डरावना पहलू इसका न्यूक्लियर प्रोपल्शन सिस्टम है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह मिसाइल उड़ान के दौरान किसी तकनीकी खराबी का शिकार हो जाए, तो यह रेडियोएक्टिव लीक का कारण बन सकती है. अमेरिकी विशेषज्ञों ने तो इसे ‘फ्लाइंग चेर्नोबिल’ का नाम दिया है, क्योंकि 1986 की चेर्नोबिल दुर्घटना की तरह यह भी पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकती है.

इस तरह की दुनिया की पहली मिसाइल

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने गर्व के साथ कहा कि ‘यह दुनिया का पहला और एकमात्र ऐसा हथियार है जो अजेय है.’ उन्होंने बताया कि जब यह प्रोजेक्ट 2018 में शुरू हुआ था, तब खुद रूसी वैज्ञानिकों को शक था कि क्या ऐसी मिसाइल बन भी पाएगी या नहीं, लेकिन अब रूस का कहना है कि इसका महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है.

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