El Nino: दक्षिण पश्चिम मानसून जोरदार रफ्तार के साथ भारत पहुंच गया है और केरल पहुंचने के कुछ ही दिनों के अंदर कई राज्यों में फैल गया है. हालांकि मौसम विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अल नीनो नाम की ग्लोबल क्लाइमेट घटना बारिश के पैटर्न पर असर डाल सकती है और दुनिया के कई हिस्सों में खतरनाक मौसम की स्थिति पैदा कर सकती है. जहां अल नीनो वाले सालों में भारत में अक्सर सामान्य से कम बारिश का खतरा रहता है वहीं इसका असर सिर्फ इसी उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं रहता. मौसम वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के मुताबिक अल नीनो की वजह से एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के देशों में भारी उथल-पुथल होने की आशंका है. 

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इंडोनेशिया और फिलिपींस में सूखे का गंभीर खतरा 

सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में इंडोनेशिया और फिलिपींस शामिल हैं. अल नीनो अक्सर इन देशों में मानसून की गतिविधि को कमजोर कर देता है. इससे लंबे समय तक सूखा रहता है और बारिश में भारी कमी आती है. 

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बारिश की कमी से धान की खेती और दूसरी कृषि गतिविधियों को नुकसान पहुंच सकता है. इसी के साथ जलाशयों और पीने के पानी की आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ता है. अल नीनो की तेज घटनाओं के दौरान ग्रामीण समुदायों को अक्सर पानी की कमी और फसल की पैदावार में गिरावट का सामना करना पड़ता है.

ऑस्ट्रेलिया में हीटवेव और जंगल की आग का खतरा 

ऑस्ट्रेलिया भी उन देशों में से एक है जहां अल नीनो वाले सालों में बड़ी उथल-पुथल होती है. देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में अक्सर काफी ज्यादा तापमान और लंबे समय तक सूखे की स्थिति देखी जाती है. सूखी वनस्पति और तेज गर्मी मिलकर जंगल की आग का खतरा काफी बढ़ा देते हैं. अल नीनो की पिछली घटनाओं के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने जंगल की आग के सबसे विनाशकारी मौसम देखे हैं. इससे अरबों डॉलर का पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान हुआ है. 

पेरू और इक्वाडोर में बाढ़ 

जहां कुछ देश सूखे से जूझते हैं वहीं पेरू और इक्वाडोर को अक्सर इसके उलट समस्या का सामना करना पड़ता है. प्रशांत तट के पास समुद्र का गर्म तापमान काफी भारी बारिश की वजह बन सकता है. यही वजह है कि आने वाली बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, पुल, घर और कृषि भूमि को काफी नुकसान हो जाता है.

मध्य अमेरिका और ब्राजील पर खतरा 

होंडुरास और निकारगुआ जैसे देश अल नीनो की अवधि के दौरान सूखे और फसल की बर्बादी के खतरे में रहते हैं. बारिश कम होने से भोजन की कमी हो सकती है और पहले से ही सीमित जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. 

वहीं ब्राजील के अमेजन वर्षावन को पाने की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है. नदियों का जलस्तर कम होने और जंगल के सूखे रहने से बड़े पैमाने पर जंगल की आग लगने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है. इस वजह से दुनिया के सबसे जरूरी इकोसिस्टम में से एक को खतरा पैदा हो जाता है. 

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अफ्रीका में मौसम की विपरीत स्थितियों 

अल नीनो का अफ्रीका पर अलग-अलग इलाकों के हिसाब से अलग-अलग असर पड़ता है. दक्षिणी अफ्रीकी देशों में अक्सर सूखे जैसे हालात बन जाते हैं. इससे मक्का और अनाज की पैदावार को नुकसान पहुंचता है और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है. इसके उलट पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों, जैसे केन्या, सोमालिया और तंजानिया में काफी ज्यादा बारिश हो सकती है. इससे बाढ़ आने, मवेशियों के नुकसान और हैजा व मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका पर भी असर

दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में सर्दियों में असामान्य रूप से भारी बारिश हो सकती है. इससे संवेदनशील इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. दक्षिणी अमेरिका में चिली और अर्जेंटीना जैसे देशों में भी काफी ज्यादा बारिश हो सकती है. इससे खेती और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा उत्तरी अमेरिका के कुछ इलाकों में सर्दियों का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकता है.

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