Tenure Of Governor In India: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इन दिनों छुट्टी पर हैं और 26 अगस्त को लखनऊ लौटने वाली हैं. उनकी छुट्टी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसके बाद राजभवन को सफाई देनी पड़ी कि इस्तीफे या बदलाव जैसी कोई बात नहीं है. इससे पहले समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी सवाल उठाया था कि राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच साल का होता है तो फिर सात साल से ज्यादा समय से पद पर बने रहने को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए.
आनंदीबेन पटेल को 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. इस पूरे विवाद के बीच लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर किसी राज्य के गवर्नर यानी राज्यपाल का कार्यकाल कितने साल का होता है और इससे जुड़े संवैधानिक नियम क्या कहते हैं.
संविधान में क्या है प्रावधान
भारतीय संविधान के भाग 6 में राज्यपाल से जुड़े नियम दिए गए हैं. अनुच्छेद 153 के तहत हर राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान है. अनुच्छेद 155 के मुताबिक, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं. वहीं राज्यपाल के कार्यकाल से जुड़ा सबसे अहम प्रावधान अनुच्छेद 156 में है. अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति की इच्छा तक अपने पद पर बना रहता है. इसी अनुच्छेद में यह भी साफ लिखा है कि राज्यपाल आमतौर पर अपने पदग्रहण की तारीख से पांच साल तक पद पर रहता है.
5 साल के बाद क्या होता है?
यहीं से यह मामला दिलचस्प हो जाता है. संविधान में यह भी प्रावधान है कि पांच साल की अवधि पूरी होने के बावजूद राज्यपाल तब तक अपने पद पर बना रह सकता है, जब तक उसकी जगह कोई नया राज्यपाल पद ग्रहण नहीं कर लेता. यानी अगर केंद्र सरकार किसी राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं करती, तो मौजूदा राज्यपाल पांच साल के बाद भी पद पर बना रह सकता है. यही वजह है कि संवैधानिक जानकार इसे नियमों के दायरे में सही मानते हैं, भले ही राजनीतिक गलियारों में इस पर सवाल उठते रहें.
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समय से पहले कैसे जा सकता है पद?
राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल से पहले भी खत्म हो सकता है. एक तो राज्यपाल खुद राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर सहित त्यागपत्र भेजकर पद छोड़ सकता है. या फिर केंद्र में प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति किसी भी समय राज्यपाल को पद से हटा भी सकते हैं. दरअसल संविधान में राज्यपाल को हटाने का कोई तय आधार नहीं बताया गया है. व्यावहारिक रूप से केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति किसी भी समय, बिना कारण बताए, राज्यपाल को बदल सकते हैं. इसी वजह से कहा जाता है कि राज्यपाल के पद को कोई निश्चित सुरक्षा हासिल नहीं है.
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