जिस उद्योग को दशकों तक कभी न रुकने वाली कमाई का भरोसा था, वही आज सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. हैरानी की बात यह है कि इसकी वजह न तो महंगाई है, न युद्ध और न ही आर्थिक मंदी. असली कारण है एक नई पीढ़ी, जिसकी पसंद, सोच और जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है. जेन Z की आदतों ने शराब उद्योग की नींव हिला दी है, आइए जानें कि आखिर मामला क्या है.
जेन Z ने कैसे बदल दिया शराब का बाजार?
दुनिया भर में शराब उद्योग इस समय गंभीर दबाव में है. बीते चार सालों में वैश्विक अल्कोहल मार्केट से करीब 830 अरब डॉलर की वैल्यू खत्म हो चुकी है. जानकारों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह जेन Z है, यानी वे युवा जो 1990 के दशक के आखिर और 2000 के बाद पैदा हुए. यह पीढ़ी शराब को लेकर उतनी उत्साहित नहीं है, जितनी पहले की पीढ़ियां हुआ करती थीं.
शेयर बाजार में दिखा असर
शराब उद्योग की हालत का अंदाजा शेयर बाजार से भी लगाया जा सकता है. ब्लूमबर्ग के एक इंडेक्स के अनुसार, 2021 के बाद से दुनिया की बड़ी शराब कंपनियों के शेयरों में करीब 46 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है. यह गिरावट सिर्फ बिक्री कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह बताती है कि निवेशकों को भी भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है.
बार की जगह योग मैट
जेन Z की लाइफस्टाइल पहले से बिल्कुल अलग है. जहां पहले युवा वीकेंड पर पब और बार में समय बिताते थे, वहीं अब फिटनेस क्लास, जिम, योग और पिलाटेज ज्यादा आकर्षक लगने लगे हैं. बीयर और कॉकटेल की जगह मॉकटेल और नॉन-अल्कोहल ड्रिंक्स उनकी पसंद बन रही हैं. इस बदलाव ने शराब कंपनियों की बिक्री के साथ-साथ ब्रांड इमेज को भी नुकसान पहुंचाया है.
सेहत बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
जेन Z के लिए सेहत कोई फैशन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है. यह पीढ़ी हैंगओवर, लिवर की खराबी और मानसिक थकान जैसे मुद्दों को गंभीरता से लेती है. सोशल मीडिया पर फिटनेस, माइंडफुलनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट ने इस सोच को और मजबूत किया है. नतीजा यह है कि शराब पीना अब ‘कूल’ दिखने का जरिया नहीं रहा.
शराब अब जरूरी आदत नहीं
पहले शराब को पार्टी, दोस्ती और स्टेटस से जोड़ा जाता था, लेकिन जेन Z के लिए यह सोच पुरानी हो चुकी है. कई युवा मानते हैं कि शराब के बिना भी मजा और सामाजिक जुड़ाव संभव है. यही कारण है कि वे कम पी रहे हैं या बिल्कुल नहीं पी रहे. इस बदलाव का सीधा असर कंपनियों की कमाई पर पड़ रहा है.
कंपनियों की बदली रणनीति
शराब उद्योग अब हालात को समझने की कोशिश कर रहा है. कई कंपनियां नॉन-अल्कोहल बीयर, लो-कैलोरी ड्रिंक्स और हेल्दी इमेज वाले प्रोडक्ट्स बाजार में उतार रही हैं. मार्केटिंग का तरीका भी बदला जा रहा है. अब विज्ञापनों में सिर्फ मस्ती और नशा नहीं, बल्कि बैलेंस्ड लाइफ और जिम्मेदार विकल्पों को दिखाया जा रहा है.
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