विराट कोहली को आमतौर पर वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे भरोसेमंद नंबर-3 बल्लेबाज के रूप में जाना जाता है. हालांकि अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कुछ मुकाबलों में ओपनर की भूमिका भी निभाई थी. यह दौर उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के हिसाब से ढालने का समय था.

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वनडे क्रिकेट में ओपनर के रूप में डेब्यू

विराट कोहली ने साल 2008 में श्रीलंका के खिलाफ अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी. इसी सीरीज में उन्होंने ओपनर के तौर पर भी बल्लेबाजी की. अपने पहले ही मैच में कोहली ने पारी की शुरुआत करते हुए 22 गेंदों पर 12 रन बनाए. यह पारी बड़ी नहीं थी, लेकिन यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की नींव पड़ी.

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ओपनर के रूप में पहला अर्धशतक

सीरीज के दौरान विराट कोहली ने तेजी से खुद को संभाला. चौथे वनडे मैच में उन्होंने ओपनर के तौर पर अपना पहला और एकमात्र अर्धशतक लगाया. इस मुकाबले में कोहली ने 54 रन की पारी खेली, जो वनडे में ओपनिंग करते हुए उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है.

ODI में ओपनर के तौर पर विराट कोहली का रिकॉर्ड

विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में कुल 7 मैचों में ओपनिंग की है. इन सभी मैचों में उन्होंने पारी की शुरुआत की और कुल 166 रन बनाए. इस दौरान उनका औसत 23.71 का रहा, जबकि स्ट्राइक रेट 65.09 रहा. ओपनर के रूप में उनके नाम एक अर्धशतक दर्ज है और वह एक भी बार शून्य पर आउट नहीं हुए. इन पारियों में उन्होंने कुल 22 चौके लगाए.

क्यों बदली गई कोहली की बल्लेबाजी भूमिका

ओपनर के तौर पर सीमित मौके मिलने के बाद टीम इंडिया ने विराट कोहली को नंबर-3 की जिम्मेदारी दी. यही फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. मध्यक्रम में उतरते ही कोहली ने निरंतरता, तकनीक और मैच जिताने वाली पारियों से खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल कर लिया है.