श्रेया पिलगांवकर ने हाल ही में अपने एक बयान में आज के समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म और अच्छे कंटेंट की अहमियत पर जोर दिया, जिससे बदलते सिनेमा का नया रूप सामने आता है. इस दौरान उन्होंने अपने करियर के बदलते सफर, इंस्पिरेशन और निजी अनुभवों को लेकर भी कुछ अहम बातें साझा की. उनके मुताबिक, ये दौर कलाकारों के लिए कई नए मौके लेकर आया है, जो उनकी सोच और काम करने के तरीके को भी बदल रहा है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा.
मुंबई के नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में आयोजित यूनेस्को क्रिएटिव सिटी फिल्म इवेंट में एक्ट्रेस श्रेया पिलगांवकर ने फिल्म इंडस्ट्री, मुंबई शहर और अपने करियर को लेकर बात की. इस दौरान उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा के बदलते दौर, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते असर और कलाकारों को मिल रहे नए मौकों पर अपनी राय रखी. श्रेया ने कहा कि मुंबई उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक इमोशन है, जिसने लाखों लोगों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला दिया है.
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मुंबई ने कई कलाकारों को पहचान दी
आईएएनएस से बातचीत में श्रेया पिलगांवकर ने कहा, 'मुंबई मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों है. एनजीएमए जैसे खास मंच पर मुंबई को यूनेस्को सिटी ऑफ फिल्म के रूप में सेलिब्रेट करना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है. लोग अक्सर मुंबई को सपनों की नगरी कहते हैं, लेकिन ये शहर सिर्फ सपने दिखाता ही नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की ताकत भी देता है. इस शहर ने अनगिनत कलाकारों को अपनी पहचान बनाने का मौका दिया है.'
माता-पिता से मिलती है इंस्पिरेशन
श्रेया ने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा, 'मेरे पिता पिछले 60 साल से सिनेमा से जुड़े हुए हैं और उन्होंने मराठी फिल्म इंडस्ट्री में काफी काम किया है. मैं अपने माता-पिता से लगातार इंस्पिरेशन लेती रहती हुं. लोग अक्सर सोचते हैं कि कलाकारों का करियर कुछ वर्षों तक ही चलता है, लेकिन मेरे माता-पिता आज भी पूरी एनर्जी के साथ काम कर रहे हैं. यही वजह है कि मैं भी जिंदगीभर एक्टिंग और कला से जुड़े रहना चाहती हूं.'
ओटीटी पर बोलीं श्रेया पिलगांवकर
श्रेया पिलगांवकर ने आगे ओटीटी को लेकर कहा, 'सिर्फ फिल्मों को देखना ही जरूरी नहीं है, बल्कि थिएटर और स्टेज आर्टिस्ट्स को भी सपोर्ट करना बहुत जरूरी है. आज ओटीटी और वेब सीरीज के आने के बाद कलाकारों के लिए नए रास्ते खुले हैं. पहले जहां कलाकारों के पास सीमित मौके होते थे. वहीं अब अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स की वजह से उन्हें अपनी कला दिखाने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं. पिछले कुछ साल में मैंने खुद भी ओटीटी पर ज्यादा फोकस किया है और वहां दर्शकों से मुझे काफी प्यार मिला है.'
कहानियों के बीच बीता बचपन
अपने फिल्मी बैकग्राउंड को लेकर भी श्रेया ने अलग नजरिया पेश किया. उन्होंने कहा, 'मैं फिल्मी बैकग्राउंड जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं, क्योंकि मैं कहानियों के बीच पली-बढ़ी हूं. बचपन से ही घर में सिनेमा का माहौल था और यही वजह है कि मुझे कहानियों और एक्टिंग से गहरा लगाव हो गया. मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरा जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां कला और सिनेमा पहले से मौजूद था.'
क्यों अच्छे कंटेंट को सपोर्ट करना जरूरी?
सोशल मीडिया और दर्शकों की सोच पर भी श्रेया ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा, 'आजकल सोशल मीडिया पर अक्सर नकारात्मक चीजों की ज्यादा चर्चा होती है, जबकि लोगों को उन कलाकारों और कहानियों के बारे में भी बात करनी चाहिए जिन्हें वे पसंद करते हैं. अगर दर्शक अच्छी कहानियों और अच्छे कंटेंट को सपोर्ट करेंगे, तभी और बेहतर फिल्में और सीरीज बनेंगी.'
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इन प्रोजेक्ट्स में आएंगी नजर
वर्कफ्रंट की बात करें तो श्रेया पिलगांवकर आने वाले महीनों में दो बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं. उन्होंने बताया कि चर्चित वेब सीरीज 'मिर्जापुर' पर आधारित फिल्म अब थिएटर में आने वाली है, जिसे लेकर वो बहुत एक्साइटेड हैं. इसके अलावा वो डायरेक्टर प्रियदर्शन की फिल्म 'हैवान' में भी दिखाई देंगी. श्रेया ने कहा कि आने वाला समय उनके लिए काफी खास होने वाला है और वह नए प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं.
