कलाकार- शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा
निर्देशन- इम्तियाज अली
रेटिंग- ** 1/2
‘जब हैरी मेट सेजल’ से बड़ी उम्मीद करने की दो ख़ास वजह हैं. पहली, शाहरुख ख़ान की रोमांटिक फिल्म में वापसी और दूसरी, प्यार और उसकी उलझनों को ख़ूबसूरती से दिखाने वाले निर्देशक इम्तियाज़ अली के साथ शाहरुख पहली बार काम कर रहे हैं.
पहली उम्मीद पर ये फिल्म खरी उतरती है. शाहरुख खान कमाल के लग रहे हैं. रोमांटिक सीन में वो अब भी जादू जगा देते हैं. वो पूरे फॉर्म में हैं.
दूसरी उम्मीद टूटती है. इम्तियाज़ अली की हर फिल्म की ख़ासियत उसका ह्यूमर, मज़बूत किरदार और सशक्त जज़्बाती सीन होते हैं जो आपको छू जाते हैं. चाहे जब वी मेट हो, लव आजकल या रॉकस्टार, उसके कॉमेडी सीन भी आपको उतने ही याद होते हैं जितने कि इंटेस डायलॉग और सीन. फिल्म के कई हिस्से इम्तियाज़ अली की ही 'जब वी मेट' लव आजकल' और 'तमाशा' से प्रभावित लगते हैं.वापस जाते वक्त सेजल को पता चलता है कि उसकी सगाई की अंगूठी खो गयी है. वो वापस नहीं जाती और हैरी के साथ हर उस जगह पर जाती है जहां उसकी अंगूठी गुम हुई थी. इसी सफ़र में पूरी फिल्म बीत जाती है. इसी सफ़र में दोनों एक दूसरा के क़रीब आ जाते है और पहले सीन से ही सबको पता होता है कि दोनों अंत में साथ भी होंगे.
फिल्म के तीन गीत- राधा, सफ़र और हवाएं खासतौर से बहुत अच्छे हैं. फिल्म की सिनेमैटोग्राफ़ी कमाल की है तो सफ़र देखने में तो बेहद खूबसूरत लगता है. काश इस सफ़र में गहरायी भी होती.
शाहरुख ख़ान के फैन निराश नहीं होंगे. मगर इतनी उम्मीद वाली फिल्म औसत से ऊपर जा ही नहीं पायी.
