हाल ही में शनिवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथ कई युवा दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करते दिखे, जिसमें उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई. इसी बीच फिल्म निर्माता-निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. 

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CJP को लेकर शक कर रहा हूं...

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मैं शुरू से ही CJP को लेकर शक कर रहा हूं, क्योंकि मैंने 2010 का दौर देखा है. साल 2010 में अन्ना हजारे ने आजादी के बाद व्यवस्था के खिलाफ सबसे बड़ा जन आंदोलन शुरू किया था. मैं भी बदलाव की उम्मीद के साथ उस आंदोलन का हिस्सा बना था. अन्ना हजारे के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट हो गया था. उस समय ऐसा लग रहा था कि भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. इसी आंदोलन से एक नाम उभरकर सामने आया था, अरविंद केजरीवाल.'

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पेपर लीक पर बोले अशोक

उन्होंने आगे लिखा, 'अन्ना हजारे के आंदोलन की भावना को अरविंद केजरीवाल ने अपने राजनीतिक करियर के लिए इस्तेमाल किया. जो खुद को नई राजनीति का चेहरा बताता था, वो बाद में उन्हीं चीजों का हिस्सा बन गया. पेपर लीक जैसे मामले गंभीर हैं और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए. इस मुद्दे पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. देश के युवाओं के भविष्य और उनकी मेहनत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. हालांकि CJP के राजनीतिक एजेंडे की वजह से असली मुद्दा पीछे छूट गया है.'

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अहमियत हासिल करने की कोशिश कर रहे...

उनका मानना है कि 'जो लोग खुद को 'यंग इंडिया' का रक्षक बताकर सामने आ रहे हैं, उन्हें भी बिना सवाल किए स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. CJP से जुड़े चेहरों का रिकॉर्ड विवादों से भरा है. कुछ लोग उमर खालिद जैसे व्यक्तियों की तारीफ करते हैं. वहीं सोनम वांगचुक जैसे लोग भी जांच के दायरे में हैं. दिल्ली चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है.

पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आने वाले चुनावों को देखते हुए वो गुस्से पैदा करके फायदा उठाना चाहते हैं. केजरीवाल, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेता अब असली जनता का समर्थन न मिलने पर ऐसे आंदोलनों के सहारे राजनीतिक अहमियत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

अशोक पंडित ने दी चेतावनी

आखिर में उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावों के नजदीक आने पर देशभर में ऐसे विरोध प्रदर्शन अचानक बढ़ सकते हैं. साथ ही उन्होंने किसान आंदोलन के बारे में बताते हुए कहा कि पहले भी विदेशी हस्तियों, टूलकिट और हाईवे पर राजनीतिक नाटक देखे जा चुके हैं, जो चुनाव खत्म होते ही गायब हो गए थे. वास्तव में मुखौटे बदलते रहते हैं, लेकिन असली चेहरा वही रहता है.

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