1960 और 70 के दशक की दिग्गज अदाकारा अचला सचदेव को 'मदर ऑफ बॉलीवुड' के तौर पर जाना जाता था. उन्होंने ज्यादातर फिल्मों में मां और दादी के रोल निभाए थे और इसके लिए उन्हें काफी पॉपुलैरिटी भी हासिल हुई. फिल्मों के साथ-साथ अचला सचदेव अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी खूब चर्चा में रहीं. उनकी निजी जिंदगी तकलीफों से भरी रहीं. अचला सचदेव की 30 अप्रैल को डेथ एनिवर्सरी है. आइए उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जानते हैं.

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रेडियो अनाउंसर के तौर पर की करियर की शुरुआतअचला सचदेव ने अपने शानदार करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और बॉलीवुड की फेमस मां और दादी बन गईं. 3 मई, 1920 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्मीं अचला एक पंजाबी परिवार से थीं. छोटी उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया था. अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए अचला ने रेडियो अनाउंसर के तौर पर ऑल इंडिया रेडियो, लाहौर में नौकरी की शुरुआत की. हालांकि, बंटवारे के बाद अचला का परिवार पेशावर से दिल्ली आ गया. दिल्ली में बसने के बाद अचला ने आकाशवाणी दिल्ली में अपनी नौकरी फिर से शुरू कर दी. अपने आकाशवाणी के दिनों में अचला फिल्मी हस्तियों का इंटरव्यू लिया करती थीं और फिर उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया.

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देव आनंद की बहन बनकर छाईं अचला सचदेवअचला ने साल 1950 में आई फिल्म 'दिलरुबा' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा. इसमें उन्होंने देव आनंद की बहन का किरदार निभाया था. इस फिल्म की सफलता ने अचला के लिए बॉलीवुड की राह खोल दी. 'दिलरुबा' की सफलता के बाद अचला ऑन-स्क्रीन मां और बहन की भूमिका निभाने के लिए बॉलीवुड की फेवरेट बन गईं. इसके बाद अचला ने 'संगम', 'फुटपाथ', 'दिल एक मंदिर', 'वक्त' और 'मिस मैरी' जैसी फिल्मों में काम किया और अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों के दिल में जगह बना ली. अचला को फिल्म 'वक्त' (1965) के लिए भी जाना जाता है. इस फिल्म में उन्होंने बलराज साहनी की पत्नी का रोल किया था. अचला और बलराज पर फिल्माया गया सॉन्ग 'ऐ मेरी जोहरा जबीं' इतना पॉपुलर हुआ था कि आज भी लोगों की जुबान पर है.

अचला सचदेवा ने की दो शादियांअचला सचदेव की निजी जिंदगी भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. उन्होंने दो शादियां की थीं. उनके पहले पति ज्ञान सचदेव फिल्म निर्देशक थे और उनसे उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम ज्योतिन सचदेव है. हालांकि, कुछ सालों बाद अचला और ज्ञान का रिश्ता टूट गया, जिसके बाद उनका बेटा अमेरिका जाकर बस गया. इसके बाद अचला ने क्लिफोर्ड डगलस पीटर्स से दूसरी शादी की. शादी के बाद वो पुणे में रहने लगीं, लेकिन कुछ समय बाद ही पीटर्स का निधन हो गया. इसके बाद अचला एक बार फिर अकेली रह गईं. 

जब रसाई में फिसलकर गिर गईं अचला सचदेवाअचला सचदेव के जीवन के आखिरी दिन बेहद कठिन रहे. पति के निधन के बाद वो पुणे में बिल्कुल अकेली रह गई थीं. सितंबर 2011 में वो रसोई में फिसलकर गिर गईं, जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया. इसके बाद जांच में उनके दिमाग में कई एम्बोलिज्म पाए गए, जिसके कारण उन्हें लकवा मार गया और उनकी आंखों की रोशनी भी चली गई. उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरी दिनों में उन्हें पहचान पाना भी मुश्किल हो गया था. करीब तीन महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 30 अप्रैल 2012 को उनका निधन हो गया. इस दौरान उनका बेटा भी उनके साथ नहीं था और उन्होंने अपने अंतिम दिन अकेले ही बिताए. 

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ये थी अचला सचदेव की आखिरी फिल्मअचला का सात दशक लंबा करियर शानदार रहा. उनकी आखिरी फिल्म करण जौहर की फैमिली ड्रामा 'कभी खुशी कभी गम' (2001) थी.

इस फिल्म में उन्होंने शाहरुख खान और ऋतिक की दादी की भूमिका निभाई थी. हमेशा की तरह उनकी एक्टिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया था.