पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल के वर्षों का सबसे तीखा राजनीतिक मुकाबला बुधवार (30 अप्रैल 2026) को रिकॉर्ड मतदान और जीत के दावों के साथ समाप्त हो गया. अब सभी राजनीतिक पार्टियों को नतीजों का इंतजार है. यह चुनाव केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गया है कि राज्य सचिवालय नबान्न तक कौन पहुंचेगा, बल्कि यह इस बात पर जनमत संग्रह बन गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 सालों के शासन के बाद भी बंगाल की केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी रहती हैं या नहीं.

Continues below advertisement

एक बड़ा सवाल ये भी है कि क्या लगातार चौथी जीत उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा स्थापित कर सकती है या फिर बीजेपी को राज्य में सत्ता का रास्ता मिल गया. दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया. पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ. यह स्वतंत्रता के बाद का अब तक का सर्वाधिक मतदान है. 

दूसरे चरण की वोटिंग के बाद जारी एग्जिट पोल की मानें तो बंगाल में बीजेपी पहली बार सरकार बना सकती है. हालांकि 4 मई को रिजल्ट आने के बाद ही चीजें पूरी तरह से साफ हो पाएगी, लेकिन अगर अभी तक के एग्जिट पर बात करें तो बीजेपी के मुद्दे को आम लोगों का सपोर्ट मिल रहा है. 

Continues below advertisement

एसआईआर

चुनाव में सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर रहा. राज्यभर में लगभग 91 लाख नाम हटाए जाने से करीब 12 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए. तृणमूल ने इसे अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, महिलाओं और गरीबों के मताधिकार को प्रभावित करने वाला कदम बताया, जबकि बीजेपी ने इसे फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया.

घुसपैठिए

बंगाल विधानसभा चुनाव के शुरू होने से पहले से ही बीजेपी घुसपैठिए का मुद्दा उठा रही है. पहले चरण की वोटिंग के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी को 152 सीटों में से 110 सीटें मिलेंगी. बीजेपी के इस आत्मविश्वास का कारण कथित अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने पर आधारित उसका अभियान हो सकता है, जो कि एग्जिट पोल में नजर भी आ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के हर कार्यकर्ता जो चुनाव प्रचार के लिए लोगों के बीच जा रहे थे वे खुलकर घुसपैठिए का मुद्दा उठा रहे थे. 

भय मुक्त वोटिंग

इस चुनाव को भय मुक्त बनाने के लिए चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों की कई कंपनियों की तैनाती की थी, जिस वजह से पूरे राज्य में वोटिंग के दोनों चरण काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे. ECI ने ये भी कहा है कि चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए 4 मई के बाद भी केंद्रीय बलों की 500 कंपनियां अगले आदेश तक पश्चिम बंगाल में ही रहेंगी. भयमुक्त माहोल और रिकॉर्ड वोटिंग को बीजेपी अपने पक्ष में देख रही है.

महिला वोटर्स

बीजेपी को इस बार बंगाल में वोट शेयर के मामले में भी बड़ी बढ़त मिलने की संभावना है. मैट्राइज एग्जिट पोल की मानें तो इस चुनाव में बीजेपी को 42.5 फीसदी वोट मिल सकता है. इस सर्वे में टीएमसी को करीब 41% और अन्य को 16.7% वोट मिलने की उम्मीद है. अगर ये आंकड़े 4 मई को सही साबित होते हैं तो बीजेपी की जीत में बड़ा योगदान महिला वोटर्स का होगा. सर्वे के मुताबिक इस बार बंगाल की 41% वुमेन वोटर्स ने बीजेपी को समर्थन दिया है. आमतौर पर बंगाल की महिला वोटर्स अब तक बड़ी तादाद में ममता बनर्जी के साथ रहती आई हैं. मतदान के आंकड़ों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रहीं.

ममता सरकार के किन मुद्दों से नाराज थे लोग

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा भी नाराज आ रहे थे. शिक्षक भर्ती घोटाला और अन्य घोटालों में पार्टी नेताओं की कथित संलिप्तता ने जनता में बहुत नाराजगी पैदा की. राज्य सरकार पर इन घोटालों की ईमानदारी से जांच न कराने का भी आरोप लगा. बीजेपी ने इन मुद्दों को पकड़ा और गांव-गांव तक जाकर लोगों को इस बारे में बताया.

ये भी पढ़ें : Exit Poll 2026 Result: बंगाल से लेकर असम-केरल और तमिलनाडु तक, कौन से एग्जिट पोल में किसकी सरकार, जानें