नई दिल्ली: राफेल डील की जांच की मांग संबंधी पुनर्विचार याचिकाओं पर सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि 2 सरकारों के बीच हुए समझौते पर पीएमओ की निगरानी को समानांतर सौदेबाज़ी कहना गलत है.
दरअसल, कांग्रेस ने इसी साल फरवरी में एक अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर दावा किया था कि राफेल डील के लिए रक्षा मंत्रालय फ्रांस सरकार से डील कर रहा था. लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने दखल दिया जिससे फ्रांस को फायदा मिला. पीएमओ की दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध किया था.
केंद्र ने हलफनामा में क्या कहा है? * दिसंबर में कोर्ट ने बहुत विचार के बाद तय किया था कि इस रक्षा सौदे में अदालत के दखल या जांच की जरूरत नहीं हैं. * पुनर्विचार याचिकाओं का आधार चुराए गए दस्तावेज हैं, जिनके चुनिंदा अंश गुमराह करने की नीयत से पेश किए जा रहे हैं. पूरी बात नहीं बताई जा रही. * 2 सरकारों के बीच हुए समझौते पर पीएमओ की निगरानी को समानांतर सौदेबाजी कहना गलत है. * सभी जरूरी दस्तावेज CAG को दिए गए थे. CAG रिपोर्ट है कि हथियारों से लैस राफेल पहले की तुलना में लगभग 3 फीसदी सस्ते मिले. * ऑफसेट पार्टनर के चयन में सरकार की कोई भूमिका नहीं. समझौते में इसका जिक्र नहीं. 36 विमान पूरी तरह तैयार स्थिति में भारत को मिलेंगे.
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ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में दिए गए फैसले में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. जिसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की. सरकार ने याचिका का विरोध किया, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विरोध के बावजूद पिछले महीने 10 अप्रैल को सुनवाई के लिए तैयार हो गया.