उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है. अखिलेश यादव के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी मोर्चा संभाल लिया है. मायावती के ताज़ा बयान ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनाव से पहले सियासी जंग और तीखी होने वाली है. अब सबकी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जवाब पर टिक गई है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने 14 अप्रैल के बाद चुनावी मोड में उतरने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं. लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने जिस तरह आरक्षण, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा, उससे साफ है कि BSP अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रही है.

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बैठक में मायावती ने कहा कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का सही लाभ तभी मिल सकता है, जब बहुजन समाज की सरकार सत्ता में हो. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “बहुजन समाज की सरकार के बिना आरक्षण को सही नीयत और नीति के साथ लागू करना असंभव है.”

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर आरोप लगाया कि वे आरक्षण व्यवस्था को “कमज़ोर और निष्क्रिय” बना रही हैं. रोजगार और गरीबी के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा. उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लोगों की रोटी-रोज़ी की स्थिति लगातार खराब हो रही है. उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारें भूख, गरीबी और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं को नारे और घोषणाओं के जरिए हल करने की कोशिश कर रही हैं.”

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लखनऊ में 14 को बीएसपी का शक्ति प्रदर्शनबसपा सुप्रीमो मायावती ने साफ किया है कि आने वाले चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयंती पर बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचें और अंबेडकर स्मारक पर श्रद्धांजलि दें. इसे BSP के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

किसे मिलेगा BSP का टिकट? ब्राह्मण नाराज़गी के बीच मायावती का बड़ा संकेत, अपराधियों की एंट्री पूरी तरह बंदउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने साफ कर दिया है कि इस बार उम्मीदवारों के चयन में सख्ती बरती जाएगी—और सबसे बड़ा संकेत यह है कि अपराधी छवि वाले लोगों को किसी भी हाल में टिकट नहीं मिलेगा.

मायावती ने कहा, “उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पार्टी कई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और बाकी सीटों पर चयन जारी है, जिन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद घोषित किया जाएगा.”

उन्होंने साफ निर्देश दिया कि उम्मीदवारों के नाम भेजने से पहले उनकी पूरी जांच की जाए. “BSP विधानसभा चुनाव में आपराधिक तत्वों को टिकट देने से सख्ती से परहेज करेगी.” यानी साफ है—इस बार टिकट उन्हीं को मिलेगा जिनकी छवि साफ है. 

प्रदेश में ब्राह्मण वर्ग की नाराज़गी की चर्चा के बीच बसपा ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ लाइन को फिर से आगे रखा है. मायावती ने कहा, “BSP अन्य राजनीतिक दलों से अलग है, इसके शब्द और कार्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से संचालित होते हैं और उम्मीदवारों के चयन में समाज के सभी वर्गों को उचित और समान प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.” इसका मतलब है कि दलित, OBC, ब्राह्मण और मुस्लिम—सभी को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम हो रहा है.

पिछले कुछ चुनावों में BSP का प्रदर्शन कमजोर रहा है, लेकिन मायावती का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है. आरक्षण, सामाजिक न्याय, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे सीधे बड़े वोट बैंक को प्रभावित करते हैं. ऐसे में BSP इन मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर BSP जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर पाती है, तो वह आने वाले चुनाव में फिर से अहम भूमिका निभा सकती है.