मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत पर सबकी नजरे हैं. शिवसेना-बीजेपी गठबंधन का आंकड़ा बहुमत के पार है लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है. शिवसेना सीएम पद की मांग कर चुकी है. फिलहाल राज्य का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने बीजेपी से कहा कि वह उनकी पार्टी को महाराष्ट्र में अगली सरकार के गठन के लिए विकल्प ढूंढने पर विवश न करे. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि राजनीति में कोई संत नहीं होता है.

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. बीजेपी ने 105 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं शिवसेना के खाते में 56 सीटें गई हैं. शिवसेना चाहती है कि 50-50 फॉर्मूले के तहत दोनों पार्टियों को ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का पद मिले.

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बीते 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के तबकों की ओर से ऐसे संकेत मिलते रहे हैं कि राज्य में बीजेपी से परे सरकार गठन का शिवसेना का कदम हकीकत में बदल सकता है. हालांकि, कांग्रेस-एनसीपी की ओर से इस बारे में औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है. एक समाचार चैनल के साथ बातचीत करते हुए कहा कि वे गठबंधन (बीजेपी के साथ) में विश्वास करते हैं. लेकिन बीजेपी को हमें सरकार गठन के लिए दूसरे विकल्प ढूंढने को विवश नहीं करना चाहिए.

संजय राउत की यह बात संभवत: वरिष्ठ सहयोगी बीजेपी को यह संकेत है कि उससे परे सरकार गठन शिवसेना के लिए पूरी तरह असंभव नहीं है. उन्होंने दावा किया कि दोनों दल सत्ता में बराबर भागीदारी पर सहमत हुए थे और इस संबंध में मुंबई में घोषणा भी की गई थी. शिवसेना नेता ने कहा कि सरकार गठन को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है. न्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर बीजेपी खुद अपने दम पर बहुमत जुटा लेती है तो वह इसका स्वागत करेंगे. केजरीवाल सरकार का दिल्ली के मजदूरों को बड़ा तोहफा, बढ़ाया न्यूनतम वेतन, 50 लाख कर्मचारियों को होगा फायदायह भी देखें