हिमाचल प्रदेश के चुनाव जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है, चुनावी मुद्दे भी रफ्तार पकड़ रहे हैं. पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा भी इन्हीं में से एक है. जिस रफ्तार से इस मुद्दे पर सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस की बयानबाजी बढ़ी है, उससे यह तय माना जा रहा है कि इस चुनाव का सबसे बड़ा और निर्णायक मामला बनने वाला है. इस मसले को पहली ही कैबिनेट में मंजूरी दिए जाने के प्रियंका गांधी के बयान के बाद अंदरखाने सरकार भले ही थोड़ा बैकफुट पर हो, लेकिन पीएम मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों और जयराम ठाकुर के काम के दम पर बीजेपी एक बार फिर कमल खिलाने को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है. 

70 साल की रमा देवी 2016 में सिंचाई विभाग से रिटायर्ड हुई थी. नौकरी से मुक्त होने से पहले उनकी तनख्वाह 32 हजार रुपए थी, लेकिन नौकरी से मुक्त होते ही उनकी पेंशन 1680 रुपए हो गई. दो बेटे और एक बेटी की ज़िम्मेदारी उठाए रामादेवी के लिए 1680 रुपए में घर चलाना बहुत कठिन था. मजबूरन रमादेवी ने मालरोड पर ही एक छोटी सी दुकान किराए पर लेकर चाय और पराठे की दुकान शुरू की. जिसमें उनका पूरा परिवार हाथ बटाता है. उसी दुकान में पूरा परिवार रात में सोता भी है. जब रमादेवी से एबीपी न्यूज ने बात की तो वो अपना दर्द छुपा न सकीं. 

उनका कहना है कि पूरी जिंदगी उन्होंने  सरकार को दे दिया....अब जब वो बूढ़े हो गए तो उन्हें 1680 रुपए मिल रहे हैं, वो कैसे अपना घर चलाएं. उनका मानना है कि पुरानी पेंशन बहाल होनी चाहिए. रमादेवी अकेली नहीं हैं. इनके जैसे करीब 9 हजार लोग हैं, जो नई पेंशन व्यवस्था के तहत रिटायर्ड हो चुके हैं और इन दिनों हिमाचल में पुरानी पेंशन को बहाल करने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं.

कांग्रेस के वादे के बाद राजनीतिक दलों में हलचल

दरअसल कांग्रेस के पुरानी पेंशन बहाली के चुनावी वादे के बाद हिमाचल की राजनीति में अचानक बड़ी तेजी से हलचल पैदा हो गई है. प्रियंका गांधी का कहना है कि उनकी सरकार आते ही सबसे पहली कैबिनेट की बैठक में पुरानी पेंशन बहाल कर दी जाएगी.

बता दें कि राज्य में करीब डेढ़ लाख न्यू पेंशनर्स में करीब 9000 ऐसे हैं जो सेवानिवृत्त हो गए हैं. पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राज्य कर्मचारी न्यू पेंशनर्स एसोसिएशन पिछले काफी दिनों से राज्य में आंदोलन चला रहे हैं. हाल ही में चुनाव को देखते हुए फिलहाल आंदोलन कुछ दिन के लिए स्थगित किया गया है. लेकिन सरकार के लिए यह किसी मुसीबत से कम नहीं

ये है मसला

हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य जहां पर नई पेंशन व्यवस्था लागू की गई थी 15 मई 2006 को नोटिफिकेशन जारी कर इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाया गया था. नोटिफिकेशन के मुताबिक नई पेंशन व्यवस्था 15 मई 2003 से प्रभाव में ली गई थी नई पेंशन व्यवस्था के तहत सरकारी नौकरी कर रहे कर्मचारी की सैलरी से 10 फ़ीसदी और राज्य सरकार की तरफ से उनकी सैलरी का 14 फ़ीसदी एक कंपनी एनएसडीएल में जमा की जाती है. उस पैसे का वह कंपनी अपने तरीके से शेयर मार्केट व अन्य माध्यमों में लगा सकती है. उससे कमाए हुए धन का कुछ हिस्सा कर्मचारियों को भी एनएसडीएल देता है, लेकिन कर्मचारियों को कहना है कि यह व्यवस्था ठीक नहीं है.

कर्मचारियों के मुताबिक इसमें कई दिक्कतें हैं जो उनके लिए ठीक नहीं, मसलन रिटायरमेंट के समय पूरी जमा हुई पेंशन का 60 परसेंट उन्हें मिलता है जबकि 40 परसेंट उनका पैसा उस कंपनी के पास रहता है. इसके अलावा सर्विस के दौरान जरूरत पड़ने पर सिर्फ तीन बार वह अपना पैसा निकाल सकते हैं वह भी जितना धन उनके पेंशन अकाउंट में जमा है उसका महज 25 फ़ीसदी ही ले सकते हैं जबकि पुरानी पेंशन धारक कभी भी कितना भी जो उनके अकाउंट में है उसे निकाल सकते थे.