कहते हैं कि असफलता ही असली शिक्षक होती है. जो इससे सीख लेता है, वही आगे चलकर बड़ी मंजिल पाता है. ऐसी ही कहानी है आईपीएस अधिकारी आकाश कुलहरि की है, जिनकी स्कूल लाइफ बहुत साधारण रही. पढ़ाई में वे अच्छे नहीं माने जाते थे. यहां तक कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. लेकिन उसी घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. आज वही आकाश कुलहरि देश के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं.

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राजस्थान के बीकानेर में जन्मे आकाश कुलहरि बचपन में पढ़ाई से ज्यादा शरारतों के लिए जाने जाते थे. क्लास 10 में उन्होंने सिर्फ 57 प्रतिशत अंक हासिल किए. स्कूल प्रशासन ने उनके प्रदर्शन से नाराज होकर उन्हें स्कूल से निकाल दिया. यही नहीं, उन्हें 11वीं में दाखिला भी नहीं दिया गया. यह उनके लिए बड़ा झटका था. लेकिन इस झटके ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि भीतर से मजबूत कर दिया.

आकाश ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद से वादा किया कि अब वे अपनी जिंदगी को नई दिशा देंगे. उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में दाखिला लिया और पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगाना शुरू किया. मेहनत का असर जल्द दिखा. 12वीं कक्षा में उन्होंने 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. जो लड़का कभी कम नंबरों के कारण स्कूल से बाहर कर दिया गया था, वही अब अच्छे अंकों के साथ आगे बढ़ रहा था.

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कहां लिया एडमिशन?

स्कूल के बाद आकाश ने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई की. इसके बाद वे दिल्ली आ गए. यहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में दाखिला लिया और एमए किया. पढ़ाई के साथ-साथ उनके मन में एक बड़ा सपना आकार लेने लगा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करने का सपना.

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पढ़ाई के दौरान शुरू की तैयारी

JNU में पढ़ाई के दौरान ही आकाश ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. वे जानते थे कि यह आसान रास्ता नहीं है. दिन-रात की मेहनत, लंबा सिलेबस और लगातार अभ्यास इन सबकी जरूरत थी. उन्होंने खुद को पूरी तरह पढ़ाई में झोंक दिया. दोस्तों के साथ कम समय, नींद कम और किताबों के साथ ज्यादा समय यही उनकी दिनचर्या बन गई.

पहले प्रयास में एग्जाम पास

साल 2005 में आकाश कुलहरि ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी. यह उनका पहला प्रयास था. बहुत से लोग कई प्रयासों के बाद भी इस परीक्षा को पास नहीं कर पाते, लेकिन आकाश ने पहली ही कोशिश में कमाल कर दिखाया. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 273 हासिल की. यह उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और शहर के लिए भी गर्व का पल था. साल 2006 में आकाश कुलहरि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए. उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला. यह भी पढ़ें - नौकरी के साथ देश सेवा भी, यहां सिर्फ 4 साल की सेवा के बाद मिलेता है,10 लाख से ज्यादा का सेवा निधि पैकेज


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