नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत स्कूलों के निर्माण को पार्किंग या कारोबारी परिसरों के निर्माण पर तरजीह दी जाएगी.
राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक प्रयोग के लिए आवंटित 2400 वर्ग मीटर जमीन पर यथास्थिति कायम रखने का निर्देश देते हुए हाई कोर्ट ने अधिकारियों से इस बात पर विचार करने को कहा कि जमीन एक अल्पसंख्यक स्कूल के निर्माण के लिए दिया जा सकता है या नहीं. यह स्कूल चार दशक पहले लगे आपातकाल के दौरान इमारत गिरने के बाद से तंबुओं में चल रहा है. कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि बच्चों को शिक्षा पाने के लिए स्कूलों की जरूरत है और जिस भूखंड को दिल्ली नगर निगम ने पार्किंग और कारोबारी परिसर बनाने के लिए आवंटित किया है, उसे अगले आदेश तक किसी अन्य उद्देश्य के लिए प्रयुक्त नहीं किया जाएगा.
हाई कोर्ट ने उपराज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा क्योंकि वह भूमि स्वामित्व एजेंसी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के प्रमुख हैं.
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