उत्तर प्रदेश में जब भी सरकारी नौकरियों की बात होती है, तो लेखपाल का पद युवाओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले पदों में से एक होता है. हर भर्ती में हजारों उम्मीदवार इस नौकरी के लिए आवेदन करते हैं. फिलहाल उत्तर प्रदेश में लेखपालों को 7वें वेतन आयोग के आधार पर सैलरी दी जाती है. राज्य में यह पद लेवल-1 पे बैंड में आता है.

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इस हिसाब से एक लेखपाल की बेसिक सैलरी करीब 21,700 रुपये होती है. लेकिन सरकारी नौकरी में सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं होती, इसके साथ कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं. इन भत्तों में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) जैसे लाभ शामिल होते हैं. यही कारण है कि जब इन सभी भत्तों को जोड़ दिया जाता है, तो लेखपाल की कुल सैलरी बढ़ जाती है.

हाथ में कितनी मिलती है सैलरी?

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अगर कुल सैलरी की बात करें तो एक लेखपाल को हर महीने लगभग 30,000 से 35,000 रुपये तक इन-हैंड सैलरी मिलती है. हालांकि यह राशि हर जगह एक जैसी नहीं होती. जिस जिले या शहर में कर्मचारी की पोस्टिंग होती है, उसके आधार पर भी कुछ फर्क आ सकता है. इसके अलावा अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी होती रहती है.

लेखपाल का काम क्यों अहम माना जाता है?

लेखपाल को गांव स्तर पर जमीन से जुड़े कई जरूरी काम करने होते हैं. खेतों की जानकारी रखना, जमीन का रिकॉर्ड संभालना, सरकारी योजनाओं से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करना और राजस्व विभाग की मदद करना जैसे कई काम इस पद के जिम्मे होते हैं.

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लेखपाल बनने के लिए क्या योग्यता जरूरी है?

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (इंटरमीडिएट) पास होना जरूरी है. यानी जो छात्र इंटर पास कर चुके हैं, वे इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा उम्मीदवार को UPSSSC की PET (Preliminary Eligibility Test) परीक्षा पास करनी होती है. यह परीक्षा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कराई जाती है. PET पास किए बिना उम्मीदवार लेखपाल भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकता.

8वें वेतन आयोग से क्या बदल सकता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.5 या उससे ज्यादा रखा जाता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव आ सकता है. यदि लेखपाल की मौजूदा बेसिक सैलरी 21,700 रुपये है, तो यह बढ़कर करीब 54,000 से 57,000 रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं, जब बेसिक सैलरी बढ़ती है तो उसके साथ मिलने वाले सभी भत्तों पर भी असर पड़ता है. महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य लाभ भी उसी हिसाब से बढ़ जाते हैं.

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