NEET Rank vs Course 2026: एनटीए ने नीट यूजी 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया है, जिसमें इस साल करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे. एनटीए के रिजल्ट के अनुसार परीक्षा में 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है. अब रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह आ रहा है कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस,  बीएएमएस या फिर अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन मिलने की संभावना है.

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आपको बता दें कि एनटीए ने किसी भी कोर्स के लिए अलग-अलग कट ऑफ जारी नहीं की है. एजेंसी केवल क्वालीफाइंग कट ऑफ घोषित करती है, जबकि एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और अन्य कोर्स में एडमिशन काउंसलिंग के दौरान ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी, सीटों की उपलब्धता और कॉलेज के क्लोजिंग रैंक के आधार पर तय होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि किस रैंक पर एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस मिलेगा. 

MBBS, BDS और BAMS के लिए कट ऑफ 

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कई छात्रों को लगता है कि एनटीए हर मेडिकल कोर्स के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी करता है, लेकिन ऐसा नहीं है. नीट में क्वालीफाई करने के लिए उम्मीदवार अलग-अलग मेडिकल और AYUSH कोर्स की काउंसलिंग में भाग लेने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं. इसके बाद सीट आवंटन उम्मीदवार की रैंक,  कैटेगरी, राज्य कोटा, ऑल इंडिया कोटा और संबंधित कॉलेज के क्लोजिंग रैंक पर निर्भर करता है. वहीं नीट स्कोर के आधार पर एमबीबीएस, बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी और बीएससी नर्सिंग कोर्स में भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट में एडमिशन मिलता है. 

किस रैंक पर किस कोर्स में मिल सकता है एडमिशन? 

स्टूडेंट की रैंक के आधार पर कॉलेज और कोर्स बदलते रहते हैं. पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेंड के अनुसार ऑल इंडिया रैंक 1 से 100 पाने वाले उम्मीदवारों के पास देश के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट जैसे एम्स और दूसरे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है. ऑल इंडिया रैंक 100 से 5000 के बीच के बीच रैंक आने वाले छात्रों को केंद्रीय संस्थानों और प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की अच्छी संभावना रहती है.

राज्य कोटा के तहत भी कई बार अच्छे ऑप्शन उपलब्ध रहते हैं. वहीं 5000 से 20,000 के बीच रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी कई राज्यों में एमबीबीएस कॉलेज मिल सकते हैं, हालांकि अंतिम सीट आवंटन कैटेगरी, राज्य और काउंसलिंग राउंड पर निर्भर करता है. वह इसके अलावा 20,000 के बाद की रैंक पर कई उम्मीदवार को सरकारी  बीडीएस बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएसएमएस बीवीएससी एंड एएच या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के ऑप्शन मिल सकते हैं. सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग राउंड के अनुसार संभावनाएं भी बदलती रहती है. 

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किस कोर्स के लिए कितना रहता है कंपटीशन? 

पिछले वर्षों के ट्रेंड के अनुसार एमबीबीएस में सबसे ज्यादा कंपटीशन देखने को मिलता है. इसके बाद बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीवीएससी एंड एएच और दूसरे आयुष कोर्स आते हैं. वहीं इनमें प्राइवेट कॉलेज और राज्य के अनुसार स्थिति अलग-अलग भी होती है. 

किस आधार पर मिलता है कोर्स में एडमिशन?

नीट क्वालीफाई करने के बाद केवल स्कोर ही पर्याप्त नहीं होता. एडमिशन के दौरान कई दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है. जैसे ऑल इंडिया रैंक, उम्मीदवार की कैटेगरी, ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा, उपलब्ध सीटों की संख्या, कॉलेज का क्लोजिंग रैंक, काउंसलिंग का राउंड और उम्मीदवार की ओर से भरे गए कॉलेज और कोर्स ऑप्शन के आधार पर एडमिशन मिलता है. 

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