जेईई मेन की तरह अब नीट यूजी और सीयूईटी यूजी को भी साल में दोबारा आयोजित करने की तैयारी हो सकती हैं. शिक्षा मंत्रालय ने प्रतियोगी और एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी को लेकर एक मसौदा तैयार किया है, जिसमें प्रमुख परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार कराने का सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही स्कूल स्तर पर छात्रों की तैयारी मजबूत करने और उन्हें प्राइवेट कोचिंग पर कम निर्भर रहने के लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग देने की सिफारिश भी की गई है. फिलहाल जेईई मेन साल में दो बार आयोजित होता है, जबकि नीट यूजी और सीयूईटी यूजी आमतौर पर साल में एक बार आयोजित होता है. ऐसे में प्रस्ताव लागू होने पर नीट और सीयूईटी में शामिल होने वाले छात्रों को भी एक ही साल में दो मौके मिल सकते हैं. 

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छात्रों की प्राइवेट कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में 9 सदस्यीय समिति बनाई थी. उस समय उच्च शिक्षा सचिव रहे विनीत जोशी की अध्यक्षता में गठित समिति को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करनी थी. विनीत जोशी के पद से हटने से पहले समिति से जुड़ा मसौदा तैयार कर एक्सपर्ट्स के साथ शेयर किया गया था, ताकि इस पर अंतिम सुझाव लिए जा सके. वहीं अभी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना बाकी है. 

साल में 2 मौके मिलने से कम होगा दबाव 

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मसौदे में प्रवेश परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार आयोजित करने की बात कही गई है. अभी जिन परीक्षाओं का आयोजन साल में केवल एक बार होता है, उनमें छात्रों के पास इस एकेडमिक सत्र में दोबारा परीक्षा देने का ऑप्शन नहीं होता. ऐसे में एक परीक्षा पर ही एडमिशन की संभावना पर निर्भर रहने से छात्रों पर दबाव बढ़ता है. वहीं दो बार परीक्षा होने पर छात्रों को अपनी तैयारी के आधार पर दो मौका में प्रदर्शन को सुधारने का अवसर मिल सकता है, हालांकि यह व्यवस्था तभी लागू होगी जब सरकार मसौदे को मंजूरी देगी. 

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प्रश्न पत्र के कठिनाई स्तर की भी होगी समीक्षा 

समिति ने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों के कठिनाई स्तर की नई सिरे से समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है. छात्रों और पेरेंट्स की ओर से अक्सर यह चिंता रही है कि कुछ सवाल निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर यह कक्षा 12वीं के स्तर की अपेक्षा काफी कठिन होते हैं. इसी को देखते हुए प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया और कठिनाई के स्तर की समीक्षा की सिफारिश की गई है, ताकि परीक्षा का स्तर छात्रों के शैक्षणिक की तैयारी के अनुरूप रखा जा सके. 

सिर्फ NCERT पर आधारित नहीं होंगे पेपर 

मसौदे में परीक्षा के सिलेबस को लेकर भी बदलाव का सुझाव दिया गया है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के पेपर सिर्फ एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार नहीं किए जाने चाहिए. बल्कि अलग-अलग राज्यों और दूसरे स्कूल बोर्ड के पाठ्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. समिति का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में केंद्रीय बोर्ड के साथ बड़ी संख्या में राज्य बोर्ड के छात्र भी शामिल होते हैं. अलग-अलग बोर्ड के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखने और सभी छात्रों के लिए परीक्षा का स्तर ज्यादा समान रखने में मदद मिल सकती है.

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