जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन काे नेहा बोरा लीड कर रही हैं. पुलिस ने उनकी झड़प और शानदार भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इससे पहले भी जब कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्र आंदोलन को लीड किया तब भी नेहा बोरा लाइमलाइट में रहीं. उन्होंने 23 दिन की भूख हड़ताल की थी. 

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नेहा बोरा की प्रसिद्धि का आलम यह है कि खुद राहुल गांधी भी उनके साथ प्रेस वार्ता कर चुके हैं. ऐसे में बहुत से लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं. वह कौन हैं, कहां की रहने वाली हैं और JNU में किस चीज की पढ़ाई कर रही हैं? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं... 

JNU की रिसर्च स्कॉलर हैं नेहा बोरा

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नेहा बोरा JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से थिएटर और परफोर्मेंस स्टडीज में Ph.D कर रही हैं. एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली नेहा ने रंगमंच से लेकर छात्र राजनीति तक के पद तक का सफर तय किया है. हाल ही में NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामलों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर की गई उनकी 23 दिनों की भूख हड़ताल ने उन्हें राष्ट्रिय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था.  

शुरुआती जीवन और शिक्षा

नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं. उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके कारण उनका बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता. उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली आ गईं, जहां उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और फिर डॉ. बी. आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की. 

थिएटर से शुरू हुआ सफर 

नेहा बोरा की पहचान सिर्फ एक छात्र नेता के रूप में नहीं है, बल्कि वह एक कुशल थिएटर कलाकार भी हैं. कॉलेज के दिनों में वह संगवारी नाम के एक थिएटर ग्रुप से जुड़ी थीं. नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच के जरिे उन्होंने समाज की जमीनी समस्याओं को करीब से देखा. इसी कला और अभिनय ने उन्हें अपनी बात को जनता के सामने रखने का हौसला दिया. 

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छात्र राजनीति में बड़ी पहचान

जेएनयू में कदम रखने के बाद नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन AISA से जुड़ गईं. अपनी मजबूत वैचारिक समझ और भाषण शैली के दम पर वह जल्द ही संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं. उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, फीस बढ़ोतरी, छात्रावास की समस्याओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है.

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