दिल्ली में नया उपराज्यपाल (LG) नियुक्त किया गया है. यह जिम्मेदारी अब तरणजीत सिंह संधू के कंधों पर है. संधू ने अपने लंबी और शानदार करियर में भारत की विदेश नीति और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है. उनके काम को न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी खूब सराहा गया है.  बता दें, तरणजीत सिंह संधू का जन्म 23 जनवरी, 1963 को हुआ था. संधू एक शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स के साथ की. इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की सैलरी कितनी है. 

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दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की सैलरी कितनी है

भारत सरकार ने सभी राज्यपालों और उपराज्यपालों के लिए एक समान वेतन तय किया है. दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की सैलरी मासिक 3.5 लाख रुपये है. इसके अलावा, उन्हें कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं, जैसे राजभवन में सरकारी आवास, सुरक्षा और सुरक्षाकर्मी, व्यक्तिगत स्टाफ और सहायक कर्मचारी, परिवार समेत मुफ्त मेडिकल सुविधाएं. इन सुविधाओं का उद्देश्य है कि उपराज्यपाल अपने कार्यकाल को सम्मानजनक और आरामदायक तरीके से निभा सकें. 

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राजनीतिक और चुनावी अनुभव

तरणजीत सिंह संधू ने साल 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था. हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उनका अनुभव और प्रतिष्ठा विदेश सेवा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में शानदार है. संधू अमेरिका में तीन बार भारत के राजनयिक रहे. इसके अलावा संधू ने श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर और जर्मनी में काउंसल जनरल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं.

साल 2013 से 2017 तक उन्होंने वाशिंगटन डीसी में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा की तैयारी में अहम भूमिका निभाई. संधू ने 2020 से 2024 तक अमेरिका में भारत के एंबेसडर के रूप में भी कार्य किया. बाद में वे एशिया ग्रुप में सीनियर एडवाइजर बने, जहां उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार और रक्षा नीतियों पर सलाह दी.

उपराज्यपाल का पद और जिम्मेदारियां

राज्यपाल और उपराज्यपाल का पद बेहद गरिमा और जिम्मेदारी वाला होता है. यह पद राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में राज्य में कार्य करता है. उनकी मुख्य जिम्मेदारियां राज्य सरकार की गतिविधियों पर निगरानी रखना, विधानसभा को संबोधित करना, विधेयकों को मंजूरी देना और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना है. 

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