Regional Languages in Bihar Schools: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब रीजनल लैंग्वेज पढ़ने का भी मौका मिलेगा. राज्य के सरकारी स्कूलों में क्लास 1 और क्लास 2 के प्राइमरी स्टूडेंट्स को 2026-27 एकेडमिक सेशन से उनकी अपनी रीजनल भाषाओं की शामिल किया जाएगा. यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के निर्देशों के अनुसार हैं, जो शुरुआत की स्टेज में बच्चों की होम लैंग्वेज या मदर लैंग्वेज को पढ़ाई का मीडियम बनाने की दिशा में कदम उठाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार इस पॉलिसी में राज्य भर में बोली जाने वाली 6 मुख्य रीजनल भाषाएं शामिल होंगी. इनमें भोजपुरी, मगही और मैथिली जैसी भाषाएं शामिल है.

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SCERT तैयार कर रहा किताबें 

बिहार की स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) की सभी 6 क्षेत्रीय भाषाओं में टेक्स्ट बुक, सप्लीमेंट्री रीडर और इंटरएक्टिव विजुअल एड्स बनाने का काम दिया गया है. वहीं मुश्किल ग्रामर सीखने के बजाय शुरुआती प्राइमरी करिकुलम में स्टूडेंट की फोनेटिक, लर्निंग लोकल लोक कथाएं, कविताएं, कम्युनिटी के काम, क्षेत्रीय मेले और रोजमर्रा के कल्चरल रेफरेंस पर भी फोकस किया जाएगा. यह तरीका क्लासरूम में पढ़ाई को जाना-पहचाना और दिलचस्प बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. ताकि घर की बोलचाल की भाषाओं से स्टैंडर्ड फॉर्मल हिंदी में बदलाव हो सके. 

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कौन सी 6 भाषाएं सिखाई जाएगी?

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार छह लोकल लैंग्वेज में किताबें तैयार कराई जा रही है. जिनमें भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका 6 भाषाएं शामिल है. इन्हीं 6 भाषाओं में भी बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी.

40 लाख बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी किताबें 

बिहार सरकार की इस योजना के अंतर्गत लगभग 40 लाख बच्चों को बिल्कुल मुफ्त में किताबें उपलब्ध कराई जाएगी. 40 लाख बच्चों तक किताबें पहुंचाने के लिए कुल 1.20 करोड़ से ज्यादा नई किताबों की छपाई का काम भी शुरू हो गया है. आपको बता दें कि इस पूरी पहल में बिहार सरकार की ओर से करीब 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. 

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नई पहल से पढ़ाई पर क्या पड़ेगा असर 

राज्य के शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि मात्र भाषा के अलावा अनजान भाषाओं में जल्दी घुलने-मिलने से अक्सर सीखने में कमी आती है और स्टूडेंट का ध्यान भटक जाता है. ऐसे में बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ने से उनकी समझ और बेसिक गिनती के लिए कॉग्निटिव रास्ते मजबूत बनते हैं. वहीं जब स्टूडेंट को उनके परिवार और आसपास के लोगों की बोली में बात करने की इजाजत मिलती है, तो वह ज्यादा कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात रखते हैं. राज्य के शिक्षा अधिकारियों के अनुसार एजुकेशन डिपार्टमेंट प्राइमरी टीचरों को बाइलिंगुअल पेडागॉजी में ट्रेन करने के लिए स्पेशल ओरिएंटेशन वर्कशॉप कराने का भी प्लान बना रहा है. जिससे टीचर बाद की क्लास में स्टूडेंट को लोकल मातृभाषा से स्टैंडर्ड हिंदी और इंग्लिश में आसानी से गाइड कर सकेंगे. 

3 और 5वीं कक्षा में भी लागू होगी व्यवस्था 

बिहार सरकार की यह पहल अभी फिलहाल कक्षा 1 और 2 के स्टूडेंट्स के लिए शुरू की जा रही है. इसके बाद सरकार की योजना इससे कक्षा 3 से 5 तक भी बढ़ाने की योजना है. वहीं कक्षा 3 और 5 के लिए बिहार सरकार की ओर से लोकल लैंग्वेज में किताबें तैयार की जाएगी.

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