गुरुवार को बिहार विधानसभा में कई अहम बिल पास किए गए. इन फैसलों का असर सीधे तौर पर नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, छात्रों, वकीलों, छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर पड़ेगा. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से व्यवस्था ज्यादा साफ-सुथरी और आसान बनेगी साथ ही इन बदलावों से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, शिक्षा व्यवस्था में मनमानी पर रोक लगेगी और व्यापार करना आसान बनेगा.कुल मिलाकर इन कदमों का मकसद प्रशासनिक कामकाज को सरल, साफ और भरोसेमंद बनाना है, ताकि आम लोगों को सीधे तौर पर फायदा मिल सके.

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सचिवालय की नौकरी में सीधी भर्ती

सबसे बड़ा बदलाव बिहार सचिवालय सेवा से जुड़ा है.अब सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 85 फीसदी पद सीधे भर्ती से भरे जाएंगे. यह भर्ती बिहार कर्मचारी चयन आयोग के जरिए होगी. इसका मतलब है कि अब ज्यादा युवाओं को सीधा मौका मिलेगा.इतना ही नहीं, पहले नौकरी लगने के बाद दो साल तक प्रोबेशन पर रहना पड़ता था, अब यह समय घटाकर एक साल कर दिया गया है. यानी जो भी युवा चयनित होंगे, उन्हें जल्दी स्थायी नौकरी का फायदा मिल सकेगा.

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माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर नजर

राज्य में चल रही सूक्ष्म वित्त कंपनियों को लेकर भी नया कानून लाया गया है. कई बार शिकायत आती थी कि कुछ कंपनियां ज्यादा ब्याज वसूलती हैं या पैसे की वसूली के लिए दबाव बनाती हैं. अब सरकार इन पर नजर रखेगी.नए नियमों के तहत ब्याज दर साफ-साफ बतानी होगी और किसी भी तरह की जबरदस्ती या गलत तरीके से वसूली नहीं की जा सकेगी. इससे छोटे व्यापारियों और जरूरतमंद लोगों को राहत मिलेगी.

वकीलों के लिए राहत

अधिवक्ताओं के लिए भी खुशखबरी है.कल्याण निधि की राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई है. इससे वकीलों को भविष्य में मिलने वाले लाभ में बढ़ोतरी होगी और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.

निजी कॉलेजों की फीस पर कंट्रोल

निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों को लेकर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. अब एक समिति बनाई जाएगी जो एडमिशन प्रक्रिया और फीस पर नजर रखेगी.अक्सर अभिभावक शिकायत करते थे कि निजी कॉलेज मनमानी फीस लेते हैं. अब नई समिति तय करेगी कि फीस कितनी हो और एडमिशन कैसे हो. इससे छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है.

व्यापार करना होगा आसान

सरकार ने बिहार संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दी है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इसका मकसद राज्य में व्यापार को आसान बनाना है.छोटे-छोटे तकनीकी मामलों में जो कानूनी झंझट होते थे, उन्हें कम किया जाएगा. इससे कारोबारियों को बेवजह की परेशानियों से छुटकारा मिलेगा और व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी.


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