Holi 2026: रंगों का त्योहार होली पूरे भारत में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लेकिन उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वृंदावन में एक अनोखी परंपरा ने पूरे समाज का नजरिया बदल दिया है. दरअसल यहां विधवाएं अब खुलकर होली समारोह में हिस्सा लेती हैं और खुशी से फूल और रंग से होली खेलती हैं. जिन विधवाओं को पहले त्योहारों से दूर रखा जाता था अब फिर से जिंदगी का जश्न मनाने लगी हैं.

Continues below advertisement

2013 में हुई एक सामाजिक क्रांति 

वृंदावन में विधवाओं के होली मनाने का रिवाज ऑफीशियली 2013 में शुरू हुआ. इस पहल को सुलभ इंटरनेशनल ने शुरू किया. उनका मकसद उन विधवाओं को इज्जत और खुशी वापस दिलानी थी जो लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक रिवाजों की वजह से अकेले रह रही थीं.

Continues below advertisement

400 साल पुरानी सामाजिक रोक को खत्म किया 

पीढ़ियों से भारत के कई हिस्सों में विधवाओं को रंगीन कपड़े पहनने या फिर त्योहार में हिस्सा लेने से रोका जाता था. उनसे ऐसी उम्मीद की जाती थी कि वे दुख की निशानी के तौर पर सादा और बेरंग जीवन ही जिएं. वृंदावन होली के जश्न ने इस 400 साल पुरानी मान्यता को चुनौती दी और तोड़ा. पहली बार विधवाओं ने गुलाल लगाया, रंगीन साड़ियां पहनीं और बाकी सब की तरह जश्न मनाया. 

विधवाओं की मुश्किलों को सामने लाने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका 

2012 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन में विधवाओं के मुश्किल हालातों पर चिंता जताई थी. इस ध्यान ने सामाजिक सुधार की कोशिशों को तेज करने में मदद की और संगठनों को उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाने के लिए बढ़ावा दिया. 

वृंदावन में विधवाएं होली कैसे मनाती हैं?

ये जश्न काफी आध्यात्मिक तरीके से मनाए जाते हैं. विधवाएं मंदिरों और आश्रमों में इकट्ठा होती हैं. वे फूलों की पंखुड़ियां को फेंक कर, गुलाल लगाकर, भक्ति गीत गाकर और भगवान कृष्ण को समर्पित भजनों पर नाच कर जश्न मनाती हैं. 

रंगभरी एकादशी और कृष्णा परंपरा से जुड़ाव 

यह उत्सव आमतौर पर रंगभरी एकादशी के आसपास मनाया जाता है. यह भगवान कृष्ण से जुड़ा एक धार्मिक अवसर है. वृंदावन भगवान श्री कृष्ण का बचपन का घर माना जाता है और होली मनाने के लिए एक खास महत्व रखता है. इस त्योहार में विधवाओं का शामिल होना सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव का एक प्रतीक है.

यह भी पढ़ें:  क्या पाकिस्तान को धूल चटा सकता है सोवियत संघ और US से टक्कर लेने वाला तालिबान, जानें इसकी ताकत?