एमबीबीएस डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्र हर साल नीट यूजी की परीक्षा देते हैं. लेकिन देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाना आसान नहीं होता है. इन इंस्टीट्यूट में सबसे ऊपर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस नई दिल्ली का नाम आता है. जहां पढ़ाई की क्वालिटी के साथ-साथ फीस भी बहुत कम है. यही वजह है कि यह कॉलेज हर मेडिकल स्टूडेंट का ड्रीम इंस्टीट्यूट माना जाता है और दिल्ली में एमबीबीएस कोर्स 5.5 साल का होता है जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है. यहां एडमिशन नीट यूजी के जरिए ही मिलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दिल्ली एम्स की फीस कितनी है और एक महीने में हॉस्टल पर कितना खर्च करना होता है.

Continues below advertisement

इतनी कम है एमबीबीएस की फीस?

एम्स दिल्ली में एमबीबीएस की कुल फीस एकेडमिक फीस बहुत कम है. एक बार में जमा होने वाली कुल फीस करीब 1628 रुपये के आसपास है. इसमें रजिस्ट्रेशन फीस 25 रुपये, सिक्योरिटी 100 रुपये, ट्यूशन फीस 1350 रुपये, लैब चार्ज 90 रुपये और स्टूडेंट यूनियन फीस 63 रुपये शामिल है. यानी पूरी मेडिकल पढ़ाई के लिए छात्रों को बहुत ही कम फीस चुकानी पड़ती है जो प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की तुलना में बहुत कम है.

Continues below advertisement

एम्स दिल्ली में हॉस्टल में रहने का खर्च कितना?

एम्स दिल्ली अपने छात्रों को हॉस्टल सुविधा भी देता है, हॉस्टल से जुड़े खर्चों की बात करें तो इसमें भी फीस काफी कम रखी गई है. हॉस्टल किराया करीब 990 रुपये, बिजली फीस 198 रुपये, पॉट फंड 1320 रुपये और जिम फीस 220 रुपये ली जाती है. इसके अलावा 1000 रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा करने होते हैं जो बाद में रिफंड हो जाते हैं. इस तरह हॉस्टल का कुल खर्च लगभग 3700 से 4200 के बीच बैठता है. अगर महीने की खर्च की बात करें तो हॉस्टल फीस एकमुश्त होती है, लेकिन खाने यानी मेस का खर्च अलग से देना होता है.

ये भी पढ़ें-HPBOSE 12th Result 2026: हिमाचल प्रदेश बोर्ड ने जारी किया 12वीं क्लास का रिजल्ट, यहां करें तुरंत चेक

विदेशी स्टूडेंट्स के लिए फीस

एम्स दिल्ली में विदेशी छात्रों के लिए भी सीटें तय हैं, उनके लिए फीस भारतीय छात्रों से अलग होती है. विदेशी उम्मीदवारों को पूरे एमबीबीएस कोर्स के लिए करीब 75000 डॉलर तक फीस देनी होती हैं, जिसे अलग-अलग इंस्टॉलमेंट में जमा करना होता है.

क्यों इतनी कम है एम्स की फीस?

एम्स दिल्ली एक सरकारी इंस्टीट्यूट है, जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी. इसके लिए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से फंडिंग मिलती है. इसी वजह से यहां मेडिकल शिक्षा की फीस काफी हद तक सब्सिडाइज्ड रहती है. कम फीस के बावजूद यहां वैश्विक स्तरीय शिक्षा, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीनिकल एक्सपोजर मिलता है जो इसे देश का सबसे पसंदीदा मेडिकल कॉलेज बनाता है.

ये भी पढ़ें-BPCL में जूनियर एग्जीक्यूटिव से एसोसिएट एक्जीक्यूटिव तक की भर्ती, 17 मई से पहले कर लें आवेदन


Education Loan Information:

Calculate Education Loan EMI