QS world university ranking 2027: भारत की हायर एजुकेशनल व्यवस्था में वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के 52 हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को जगह मिली है, जबकि 2015 में यह संख्या महज 11 थी. केंद्र सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा के विस्तार और संस्थानों में किए गए अलग-अलग सुधारो का असर विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति पर दिखाई दे रहा है. वहीं QS रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों की संख्या बढ़ने के साथ कई संस्थानों की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है. 52 भारतीय संस्थानों में से 26 की रैंकिंग बेहतर हुई, 9 संस्थान अपनी पिछली स्थिति पर कायम रहे और 15 की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई. वहीं 2 संस्थाओं ने पहली बार इस रैंकिंग में जगह बनाई. 

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IIT दिल्ली रहा सबसे आगे 

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में आईआईटी दिल्ली भारत का सबसे बेहतर रैंक वाला संस्थान रहा. आईआईटी दिल्ली ने 5 पायदान की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 118वीं रैंक हासिल की है. इसके बाद आईआईटी बॉम्बे 134वें, आईआईटी मद्रास 170वें, आईआईटी खड़गपुर 205वें और आईआईएससी बैंगलुरु 221वें स्थान पर रहा. आईआईटी बॉम्बे की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले 5 स्थान नीचे आई है. वहीं आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर की स्थिति में सुधार हुआ है. 

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IIT के अलावा इन संस्थाओं ने भी किया बेहतर प्रदर्शन 

इस बार वैश्विक रैंकिंग में भारत की बेहतर स्थिति केवल IIT और IISc तक सीमित नहीं रही. कई नॉन आईआईटी संस्थानों ने भी रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है. जैसे बिट्स पिलानी 93 स्थान ऊपर चढ़कर 575वें स्थान पर पहुंचा, जबकि VIT ने 94 पायदान की छलांग लगाकर 597वीं रैंक हासिल की. शूलिनी यूनिवर्सिटी ने भी 51 स्थान ऊपर उठकर 452वें स्थान पर पहुंची है.  इसके अलावा आईआईटी हैदराबाद की रैंकिंग में 76 स्थान का सुधार हुआ. वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया ने भी 75 से ज्यादा स्थान ऊपर पहुंचकर 686वीं रैंक हासिल की. रैंकिंग में शामिल मिल 52 भारतीय संस्थानों में से 18 ने अपना अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया जिनमें 13 नॉन आईआईटी इंस्टीट्यूट शामिल है. 

सरकार ने NIRF और NEP को दिया श्रेय 

केंद्र सरकार ने भारत की वैश्विक रैंकिंग की बढ़ती मौजूदगी को NIRF और उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों से भी जोड़ा है. एनआईआरएफ की शुरुआत 2015 में हुई. इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन शिक्षण एवं संसाधन, रिसर्च और प्रोफेशनल प्रैक्टिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच एवं इंक्लूसिविटी और पीयर परसेप्शन जैसे मानकों पर किया जाता है. इसके अलावा सरकार ने वैश्विक रैंकिंग में भारतीय संस्थानों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) समेत कई पहलों को भी जरूरी बताया.

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