दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब छात्रों की पढ़ाई के साथ उनकी रीडिंग हैबिट्स पर भी ध्यान दिया जाएगा. शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों को सभी स्कूल दिनों में छात्रों के लिए 30 मिनट का रीडिंग पीरियड तय करने का निर्देश दिया है. खास बात यह है कि इसके लिए स्कूल अपने टाइम टेबल में किसी दूसरे पीरियड को हटाकर या बदलकर जगह नहीं बना सकेंगे. पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए पूरे साल लाइब्रेरी से जुड़ी कई गतिविधियां भी कराई जाएगी. यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया है. इसे लेकर  शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों में नियमित रूप से किताबें पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने और स्कूल की लाइब्रेरी के बेहतर इस्तेमाल के लिए साल भर की गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया गया है. 

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रोज 30 मिनट का होगा रीडिंग पीरियड 

स्कूलों में 30 मिनट के रीडिंग पीरियड के दौरान छात्र शांत होकर किताबें पढ़ेंगे. इसके साथ किताबों पर चर्चा और पढ़ने से जुड़ी दूसरी एक्टिविटी भी कराई जाएगी. स्कूलों को रोजाना 10 से 15 मिनट का ड्रॉप आउट एवरीथिंग एंड रीड सेशन आयोजित करने के लिए भी कहा गया है. इसके अलावा पूरे साल साप्ताहिक लाइब्रेरी पीरियड, किताबों की रीडिंग, बुक टॉक और कहानी सुनाने जैसी एक्टिविटी कराई जाएगी. छात्रों को किताबों की समीक्षा, पसंदीदा किताबों की सिफारिश और उनसे जुड़े विचार शेयर करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा. 

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लंच ब्रेक में भी खुली रहेगी लाइब्रेरी 

सरकार के निर्देशों के तहत स्कूलों को अपनी लाइब्रेरी को छात्रों के लिए ज्यादा सुलभ बनाने के लिए कहा गया है. लंच के दौरान भी लाइब्रेरी खुली रखने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि जो छात्र चाहे वह इस समय का इस्तेमाल किताबें पढ़ने में कर सके. स्कूलों में रीडिंग कॉर्नर और रीडिंग वॉल जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएगी. रीडिंग वॉल पर छात्र किताबों की समीक्षा,  कोट्स, चित्र और किताबों से जुड़ी अपनी सिफारिश से प्रदर्शित कर सकेंगे.

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हर छात्र के लिए 20 किताबों की उपलब्धता 

शिक्षा विभाग ने स्कूलों की लाइब्रेरी को ज्यादा उपयोगी और आकर्षक बनाने पर भी जोर दिया है. निर्देशों के अनुसार लाइब्रेरी में प्रति छात्र कम से कम 20 किताबें उपलब्ध होनी चाहिए. लाइब्रेरियन को नई किताबों को प्रमुखता से प्रदर्शित करने, छात्रों को किताबें जारी करने और उनके पढ़ने का रिकॉर्ड अपडेट रखने की जिम्मेदारी भी दी गई है. लाइब्रेरियन को ऐसे छात्रों की पहचान करने के लिए भी कहा गया है, जिनकी पढ़ने में कम रुचि है, ताकि उन्हें अलग से प्रोत्साहित किया जा सके.

साल भर होगी रीडिंग से जुड़ी गतिविधियां 

छात्रों को पढ़ने से जोड़ने के लिए स्कूलों में साल भर अलग-अलग एक्टिविटी आयोजित करनी होगी. इनमें सप्ताह में दो बार बुक डिस्कशन, रीड अलाउड सेशन, बुक टॉक और स्टोरी टेलिंग जैसे गतिविधियां शामिल है. हर महीने रीडिंग असेंबली आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया है. इसके अलावा रीडिंग चैलेंज, बुक एग्जिबिशन, बुक डोनेशन ड्राइव और सालाना रीडिंग फेस्टिवल जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी. कुछ छात्रों को रीडिंग एंबेसडर के तौर पर भी जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि वह दूसरे छात्रों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सके. 

परिवारों को भी जोड़ा जाएगा 

रीडिंग अभियान को सिर्फ स्कूल तक सीमित रखना नहीं रखने का गया है. साल में दो बार फैमिली रीडिंग भी का आयोजित किया जाएगा. इससे परिवार को भी बच्चों के साथ पढ़ने की एक्टिविटी में शामिल करने की योजना है. स्कूलों को छात्रों के पढ़ने का रिकॉर्ड रखने के लिए रीडिंग पासपोर्ट जैसी व्यवस्था अपनाने के लिए भी कहा गया है. इससे छात्रों की रीडिंग एक्टिविटीज को नियमित तौर पर दर्ज किया जा सकेगा.

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