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1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट : 24 साल बाद फ्राइडे को हुआ 'ब्लैक फ्राइडे' का हिसाब

ABP News Bureau   |  16 Jun 2017 07:20 PM (IST)
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कुछ पल बाद ही दिन के करीब ढाई बजे शिवसेना भवन के पास भी बम फटा. उस वक्त ना तो सेल फोन था और ना ही पेजर, फिर भी खबर जंगल में आग की तरह फैली. शिवसेना भवन के पास हुए धमाकों में 4 की जान गई और 50 जख्मी हो गए. तीन मिनट बाद ही नरीमन प्वाइंट की एयर इंडिया बिल्डिंग धमाके से दहल गई वहां 20 लोग बेमौत मारे गए इसी तरह वर्ली के सेंचुरी बाजार के सामने भी मौत का तांडव दिखा. वर्ली के सेंचुरी बाजार में एक डबल डेकर बस में धमाका हुआ था. 5 दूसरी बसें भी इसकी चपेट में आ गई थीं. उस वक्त वर्ली शायद निशाने पर था, इसीलिए पासपोर्ट दफ्तर के पास ही एक दूसरा धमाका भी हुआ.

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ब्लैक फ्राइडे के खूनी दिन की ये तो सिर्फ शुरुआत थी. दस मिनट बाद ही नर्सी नत्था स्ट्रीट की अनाज मंडी के एक ट्रक में धमाका हुआ. जब तक शहर कुछ समझ पाता 50 मिनट बाद स्टॉक एक्सचेंज से कुछ ही दूर एयर इंडिया की इमारत के पार्किंग में धमाका हुआ. ये विस्फोट इतना जबरदस्त था कि बेसमेंट की दोनों मंजिलों में बड़े गड्ढे पड़ गए. गुलजार रहने वाली अनाज मंडी में चीखें गूंजने लगीं. मंडी में 5 लोग मारे गए और 50 से ज्यादा लहुलुहान होकर जमीन पर पड़े थे...आगे जानिए...

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पहला धमाका दोपहर एक बजकर 28 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत के बाहर हुआ और फिर लाशों के ढेर लग गए. धमाका इतना जबरदस्त था कि 29 मंजिला बीएसई की इमारत थर्रा गई थी. जो जहां था वहीं गिर पड़ा और काला धुआं छंटा तो तबाही सामने आई. चारों ओर छितराईं लाशें, रोते-बिलखते और डर से चीखते लोग दिख रहे थे. उस वक्त देश की आर्थिक राजधानी के शेयर बाजार में दो हजार लोग मौजूद थे. बेसमेंट की पार्किंग में आरडीएक्स से लदी एक कार में टाइमर के जरिये धमाका हुआ था, जिसमें 84 बेगुनाह मारे गए और करीब सवा दो सौ जख्मी हुए थे...आगे जानिए...

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सीबीआई के मुताबिक, मुंबई धमाके 6 दिसंबर 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे. सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि ये धमाके दुनिया का पहला ऐसा आतंकी हमला था, जहां दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इतने बड़े पैमाने पर आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था. मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने आज इस मामले में जो फैसला सुनाया है उसकी सुनवाई 2011 में शुरु हुई थी. पूरी सुनवाई इस साल मार्च में खत्म हुई...आगे जानिए...

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दरअसल भारत में मोस्ट वांटेड बन जाने के बाद सलेम देश छोड़कर भाग गया था. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका था. इंटरपोल लगातार उसकी तलाश कर रही थी. आखिरकार 20 सितंबर 2002 को अबू सलेम अपनी प्रेमिका मोनिका बेदी के साथ लिस्बन, पुर्तगाल में पकडा गय़ा. फरवरी 2004 में पुर्तगाल की एक अदालत ने भारत में अबू सलेम के प्रत्यपर्ण की मंजूरी दे दी. मगर एक शर्त के साथ. शर्त ये थी कि अबू सलेम को फांसी की सजा नहीं दी जाएगी क्योंकि पुर्तगाल में फांसी की सजा पर रोक है. कानूनी जानकारों के मुताबिक पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि होने के कारण कोर्ट उसे फांसी या आजीवन कारावास की सजा नहीं दे सकता है. उसे अधिकतम 25 साल तक की सजा दी जा सकती है...आगे जानिए...

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यहां हम आपको ये भी बता दें कि मुंबई धमाकों के मामलों में अदालत ने आरोपियों के दूसरे बैच पर यह फैसला दिया है. इससे पहले, धमाकों के केस में शुरुआती 123 आरोपियों का ट्रायल 2006 में खत्म हुआ था, जिसमें 100 को सजा सुनाई गई थी. सजा पाने वालों में अभिनेता अभिनेता संजय दत्त भी शामिल थे. अबू सलेम ने माना था कि उसने संजय दत्त को हथियार दिए थे. अबू सलेम का गुनाह बेहद संगीन है लेकिन इसके बाद भी उसे फंसी की सजा नहीं सुनाई जा सकती है. इसकी वजह है पुर्तगाल से हुई प्रत्यर्पण संधि...आगे जानिए...

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यहां हम आपको ये भी बता दें कि मुस्तफा डोसा को अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी माना जाता है. धमाकों की ये साजिश मुस्तफा डोसा ने दाऊद, के साथ मिलकर दुबई में रची थी और इस साजिश में उसका भाई मोहम्मद डोसा भी शामिल था जो फिलहाल फरार है. मोहम्मद डोसा के अलाबा 32 और आरोपी फरार चल रहे हैं जिनमें से मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहिम, उसका भाई अनीस इब्राहिम और टाइगर मेमन शामिल है...आगे जानिए...

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मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 1993 के सीरियल बम बलास्ट मामले में मुस्तफा डोसा, अबू सलेम, ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान को मुख्य साजिशकर्ता माना है. अदालत ने अबू सलेम को कई धाराओं में दोषी करार दिया है. अबू सलेम पर ये आरोप थे कि उसने बम कांड को अंजाम देने के लिए हथियारों का कंसाइनमेंट रिसीव करके ठिकाने तक पहुंचाया और तमाम सबूतों की बिनाह पर डॉन पर लगा ये आरोप सच साबित पाया गया...आगे जानिए...

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1993 के सीरियल मुंबई बम ब्लास्ट मामले में 24 साल बाद सबसे बड़ा फैसला आया है. मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने धमाकों के आरोपी डॉन अबू सलेम के साथ ही पांच और आरोपियों को दोषी करार दिया है. अदालत ने फ्राइडे (शुक्रवार) के दिन ही ब्लैक-फ्राइडे का हिसाब कर दिया है. 12 मार्च 1993 को शुक्रवार ही था और तब एक के बाद एक 13 धमाकों के साथ मुंबई दहल गई थी...आगे जानिए...

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धमाकों में 257 लोग बेमौत मारे गए थे और 713 लोग गंभीर रुप से जख्मी हुए थे. धमाकों के ये जख्म इतने गहरे थे कि वक्त भी उसे भर नहीं पाया. देखते-देखते कई साल गुजर गए. अब 24 साल बाद आए इस फैसले का इंतजार पूरे देश को था. अदालत ने धमाको के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के साथ ही धमाकों में संलिप्त पांच और आरोपी मुस्तफा डोसा, करीमुल्ला शेख, ताहिर मर्चेंट, फिरोज खान और रियाज सिद्दीकी को दोषी करार दिया है. जबकि एक आरोपी अब्दुल कयूम को बरी कर दिया गया है...आगे जानिए...

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