India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने के करीब है. कॉमर्स सेक्रेट्री राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) की पहली किस्त (ट्रांश) को लेकर सहमति लगभग बन चुकी है और इसे जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है. यह बात नए अमेरिकी राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सर्जियो गोर के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके देश के लिए नई दिल्ली जितना ज़रूरी कोई और देश नहीं है. हालांकि, डील पर साइन कब तक की जानी है इसकी कोई टाइमलाइन अभी तय नहीं है.
क्यों जरूरी है अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील?
भारत के लिए यह ट्रेड डील बहुत जरूरी है क्योंकि अमेरिका सामान और सेवाओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. भारत और अमेरिका के बीच डील पर मुहर लगने के बाद अमेरिका के लिए भारत का एक्सपोर्ट मार्केट और भी ज्यादा मजबूत होगी. अमेरिकी बाजारों में किफायती रेट्स पर भारतीय सामानों व सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, तो इसका फायदा भारतीय एक्सपोटर्स को मिलेगा.
ट्रेड डील के कई फायदे
ट्रेड डील के चलते अगर सामानों के आयात पर टैरिफ न लगे या मामूली रेट पर लगे, तो इसके कई फायदे हैं क्योंकि भारत में कई वर्ल्ड क्लास कंपनियां हैं, जिनके लिए अगर अमेरिकी बाजार खुले, तो ये काफी अच्छा कर सकती हैं. अमेरिका के साथ BTA से अमेरिकी ट्रेड और इन्वेस्टमेंट कम्युनिटी को एक पॉजिटिव संकेत जाएगा कि भारत स्वागत करता है और बिजनेस के लिए खुला है. यह भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विदेशी निवेश आकर्षित करने और खुद को चीन के विकल्प के तौर पर सप्लाई चेन हब के रूप में बढ़ावा देने के लिए बहुत ज़रूरी है, जो भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में से एक है.
अरबों डॉलर के कारोबार की है बात
भारत के 30 ऐसे सेक्टर्स हैं, जहां से अमेरिका को सामान भेजे जाते हैं. इनमें से छह एग्रीकल्चरल बेस्ड प्रोडक्ट्स और बाकी के 24 इंडस्ट्री बेस्ड प्रोडक्ट्स हैं. मिसाल के तौर पर जूलरी से लेकर कपड़े, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, केमिकल, ऑटोमोबाइल से रिलेटेड प्रोडक्ट्स भारत से अमेरिका भेजे जाते हैं. भारत से अमेरिका को 4.39 अरब डॉलर के कपड़े भेजे जाते हैं, 11.88 अरब डॉलर के सोने-चांदी और हीरे का निर्यात होता है.
इतना ही नहीं, भारत अमेरिका को 14.39 अरब डॉलर के मोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस भी बेचता है. ऐसे में यह ट्रेड डील इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अब यह सिर्फ कारोबार का दायरा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक्सपोर्ट के साथ-साथ रोजगार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी से भी जुड़ा हुआ है.
ट्रेड डील पक्की हुई, तो अपने देश में अमेरिकी कंपनियों का निवेश भी बढ़ेगा. भारत के क्लीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेगमेंट में अमूमन अमेरिका बड़े पैमाने पर निवेश करता है. इससे फायदा अपने देश को ही है. ट्रेड डील के फाइनल होने से लेबर-इंसेंटिव सेक्टरों में काम करने वाले मजदूरों की भी स्थिति सुधरेगी, जो काफी हद तक अमेरिकी ऑर्डर पर निर्भर हैं. ट्रेड डील से टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं कम होने से अमेरिका के लिए भारतीय निर्यात में 15-20 परसेंट तक उछाल की संभावना है.
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