यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की शुरुआत करने वाले देश भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर कुछ असमंजस चल रहा है. भारतीय यूपीआई यूजर्स के सामने आजकल ऐसे दो विकल्प हैं, जिनका इस्तेमाल वो कर रहे हैं. इसमें मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लिमिट के साथ UPI ट्रांजेक्शन लिमिट पर भी भारतीय ग्राहकों के सामने कई विकल्प हैं जिनको ठीक से जानना जरूरी है.  

Continues below advertisement

15 अक्टूबर से जो नया नियम आ रहा है उसके तहत 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजेक्शन्स पर एमडीआर (MDR) लागू होगा. जबकि 2000 रुपये तक के या उससे कम सीमा के मर्चेंट पेमेंट पर कोई एमडीआर लागू नहीं हो रहा है. 

यूपीआई यूजर्स के सामने डिजिटल पेमेंट करने के दौरान दो ऐसे ऑप्शन्स आते हैं जिनको वो चुन सकते हैं- यूपीआई ट्रांजेक्शन लिमिट और 2000 रुपये की नई MDR लिमिट. इन लिमिट को हालांकि यूपीआई से कनेक्टेड करके देखा जा सकता है फिर भी ये दोनों अपने आप में अलग हैं और यूजर्स को इनमें कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए. आपकी मदद करने और जानकारी बढ़ाने के लिए इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं-

Continues below advertisement

क्या है कन्फ्यूजन?

दरअसल पहले के नियमों में ये कहा गया था कि MDR कुछ चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर ही लागू होगा, जबकि दूसरा अपडेट ये बताता है कि यूपीआई के साथ यूजर्स कितना अधिकतम पेमेंट कर सकते हैं. यहां यूपीआई ट्रांजेक्शन की लिमिट और 2000 रुपये की मर्चेंट डिस्काउंट रेट की थ्रैशहोल्ड( सीमा) शामिल हैं. 

UPI की ट्रांजेक्शन लिमिट क्या है?

UPI की ट्रांजेक्शन लिमिट एक अलग कॉन्सेप्ट है. इसके तहत बैंकों और NPCI को ये तय करना आसान होता है कि कौन से ट्रांजेक्शन केटेगरी के आधार पर कौनसी ट्रांजेक्शन लिमिट लगाई जाए. इन ट्रांजेक्शनम सीमा को खासतौर से सिक्योरिटी के लिए और जोखिम के प्रबंधन के लिए रखा गया है.

सूत्रों के मुताबिक इस लिमिट में 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की कीमत के ट्रांजेक्शन आते हैं और ये ट्रांजेक्शन कैटेगरी के आधार पर तय होते हैं. सीधे शब्दों में इसका मतलब है कि अगर यूजर्स ने 2000 रुपये तक का पेमेंट किया तो इससे ये नहीं माना जा सकता है कि ऑटोमैटिक तरीके से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो जाएगा. एमडीआर ट्रांजेक्शन की वैल्यू और टाइप के आधार पर लागू होता है. 2000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा. 

इसे उदाहरण से समझें

  • 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर 0.4 परसेंट या अधिकतम 300 रुपये का एमडीआर लगेगा.
  • 50,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर 200 रुपये का एमडीआर लगेगा.
  • 5000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर 20 रुपये का एमडीआर लगेगा. 
  • 1 लाख रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर गणित के हिसाब पर 400 रुपये का एमडीआर लगेगा लेकिन इस पर 300 रुपये तक का एमडीआर लगेगा.
  • पी2पी (P2P) लेनदेन के तहत दोस्त या परिवार को पैसे भेजने पर 0 परसेंट यानी कोई एमडीआर नहीं लगता.

2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 0.4 परसेंट या अधिकतम 300 रुपये का एमडीआर लगेगा. गौरतलब है कि MDR देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का एक चार्ज है और NPCI या सरकार का उद्देश्य ग्राहकों पर चार्ज लगाना नहीं माना जाना चाहिए. 

UPI ट्रांजेक्शन लिमिट के बारे में जानें

मान लीजिए कि किसी यूजर ने 10,000 का यूपीआई पेमेंट किया और ये रकम 2000 रुपये से ज्यादा है तो उसपर एमडीआर के नियमों के तहत चार्ज लग सकता है. हालांकि कुछ सेक्टर्स को इस लिमिट से कुछ अलग भी चार्ज देने पड़ सकते हैं. जैसे कि रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और एग्रीकल्चर सेक्टर, इनमें 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये का एमडीआर और देना पड़ सकता है.

दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल होने वाले  UPI के जरिए डिजिटल ट्रांजेक्शन का प्रसार काफी बढ़ चुका है और इसमें भारत सबसे आगे है. यूपीआई पर हाल ही में लगे चार्जेज को लेकर जो गतिरोध जारी है, उसको देखते हुए आपको इस डिजिटल ट्रांजेक्शन और एमडीआर की लिमिट के बारे में जानकर फायदा होगा.

यह भी पढ़ें- इस महीने 25 सितंबर को ही आ जाएगी सैलरी, जानें सरकार के इस फैसले की असली वजह