जब भी हम इंटरनेशनल फ्लाइट में सफर करते हैं, तो हमें पहले से वीजा बनवाना पड़ता है, तभी हम किसी दूसरे देश में एंट्री कर पाते हैं. लेकिन क्या पायलट और फ्लाइट अटेंडेंस क्रू मेंबर्स, जो हर हफ्तें कई देशों में जाते हैं, उन्हें भी हर बार वीजा लेना पड़ता है? यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस देश में जा रहे हैं और किस देश के नागरिक हैं? कुछ देशों में क्रू मेंबर्स को आसानी से बिना वीजा के एंट्री मिल जाती है, तो कुछ देशों में उनके लिए खास तरह का वीजा जरूरी होता है. 

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ज्यादातर देश किसी विदेशी एयरलाइन को अपने यहां फ्लाइट ऑपरेट करने की इजाजत देने से पहले एक जनरल डिक्लेरेशन नाम का दस्तावेज मांगते हैं, इस दस्तावेज में फ्लाइट से जुड़ी हर जानकारी होती है, जिसमें सभी पायलट और क्रू मेंबर्स के नाम, उनके आने-जाने की डिटेल्स शामिल होती हैं. एयरलाइन के अधिकृत अधिकारी द्वारा साइन किया गया यह दस्तावेज संबंधित देशों के अधिकारियों को सौंपा जाता हैं. बहुत से देश इसी जनरल डिक्लेरेशन को स्वीकार कर लेते हैं और क्रू मेंबर्स को अलग से वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती. 

अमेरिका और चीन जैसे देशों में जरूरी है क्रू वीजा

कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां विदेशी एयरलाइनों के पायलट और केबिन क्रू को एंट्री से पहले खास क्रू वीजा लेना अनिवार्य होता है. अमेरिका में इसके लिए C-1/D वीजा लेना पड़ता है, और बिना इस वीजा के एंट्री नहीं मिलती. इसी तरह चीन में भी सभी फ्लाइट अटेंडेंट और पायलट के लिए C वीजा जरूरी है, और बिना इसके एंट्री करने पर जुर्माना या देश से निकाले जाने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. यूरोप के शेंगेन जोन में भी नॉन-ईयू क्रू मेंबर्स को कई बार अलग से क्रू शेंगेन वीजा लेना पड़ता है. 

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कुछ देशों के साथ है विशेष समझौता

कुछ देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते होते हैं, जिनकी वजह से वहां के पायलट और क्रू मेंबर्स को एक-दूसरे के यहां बिना वीजा के आने-जाने की छूट मिलती है. उदाहरण के लिए ब्रिटेन और ब्राजील के बीच ऐसा ही एक समझौता है. इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के नियमों के तहत भी सिविल एयर और सी क्रू मेंबर्स को अपनी ड्यूटी निभाते समय कुछ खास वीजा शर्तों से छूट दी गई है.

निजी जेट के क्रू के लिए अलग हैं नियम

प्राइवेट जेट पर काम करने वाले पायलट और क्रू मेंबर्स के लिए स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है. ज्यादातर मामलों में उन्हें जनरल डिक्लेरेशन की सुविधा नहीं मिलती, इसलिए उन्हें भारत, चीन और रूस जैसे देशों में सामान्य यात्रियों की तरह खुद अपना वीजा बनवाना पड़ता है. भारत में तो हैंडलिंग एजेंसियां भी वीजा ऑन अराइवल की सुविधा नहीं कराती, जिससे प्राइवेट जेट क्रू को पहले से ही पूरी तैयारी करके जाना पड़ता है, ताकी आखिरी वक्त पर किसी परेशानी का सामना न करना पड़े. 

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