SIP Investment: अपने भविष्य के लिए निवेश करना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है. इसके लिए सबसे आसान लोगों को SIP (सिस्टमैटिक इवेस्टमेंट प्लान) ही लगता है. इसके जरिए लंबे समय तक निवेश करने पर अच्छा खासा रिटर्न मिलता है. लेकिन एसआईपी को लेकर लोगों में अब भी काफी कंफ्यूजन है. लोगों को लगता है कि SIP की तारीख को बदल दिया जाएगा तो इससे ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है. लेकिन क्या है वाकई में होता है? आइये बताते हैं.

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SIP की तारीख बदले से होगा फायदा?बाजार के उतार चढ़ाव का असर SIP पर भी पड़ता है. ऐसे समय में कई लोगों को लगता है कि कुछ समय के लिए निवेश को बंद कर देना चाहिए या नहीं? कई लोगों का मानना होता है कि महीने की सही तारीख चुनने या बाजार की कमजोरी के दौरान निवेश से बचने पर लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है.

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निवेश की सही टाइमिंग कितनी जरूरी है, इसे समझने के लिए व्हाइटओक म्यूचुअल फंड ने अगस्त 1996 से अप्रैल 2026 तक BSE Sensex TRI पर एक अध्ययन किया. इस स्टडी में देखा गया कि अगर एक निवेशक हर महीने बाजार के सबसे अच्छे दिन SIP करता और दूसरा निवेशक सबसे खराब दिन निवेश करता, तो दोनों के रिटर्न में कितना फर्क आता.

स्टडी में सामने आया कि...इस स्टडी में पाया गया कि जो निवेशक हर महीने बाजार के सबसे अच्छे दिन SIP करता है, उसे करीब 13.80% का XIRR रिटर्न मिला. वहीं, जो निवेशक हर महीने सबसे खराब दिन निवेश करता रहा, उसे भी 13.32% का XIRR मिला. यानी करीब 30 साल में दोनों के रिटर्न में सिर्फ 0.48% का ही अंतर रहा. रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि जो लोग बाजार की सही टाइमिंग पकड़ने की कोशिश किए बिना हर महीने एक तय तारीख पर SIP करते रहे, उन्हें 13.58% का XIRR मिला.

ये रिटर्न सबसे अच्छे दिन निवेश करने वाले निवेशक के काफी करीब था. इससे साफ पता चलता है कि SIP में बाजार की टाइमिंग से ज्यादा जरूरी नियमित और लंबे समय तक निवेश करना है.

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