Retirement Plan: नौकरीपेशा लोगो के लिए रिटायर होना आसान नहीं होता है. रिटायरमेंट के समय 50 लाख रुपये होना सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन असली परिक्षा रिटायरमेंट के बाद शुरू होती है. अब सवाल उठता है कि आखिर इस पैसे को महंगाई से सुरक्षित और स्थिर मासिक आय में कैसे बदला जाए. रिटायरमेंट के बाद अब चुनौती कमाई करने की नहीं है, असली चुनौती अपनी कमाई की वैल्यू को धीरे-धीरे कम होने से बचाने की है.

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रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा खतरा महंगाई

दरअसल, रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा खतरा महंगाई होती है, जो धीरे-धीरे बचत की ताकत को खत्म कर देता है. मेडिकल बिल, रोजमर्रा के खर्च, बिलजी बिल और अन्य चीजों के बिल समय के साथ बढ़ते रहते हैं. असल में यही रिटायरमेंट का असली जोखिम है. इसीलिए रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब अब सिर्फ़ 'पैसे को सुरक्षित रखना'नहीं है. इसका मतलब है अपनी जीवनशैली को सुरक्षित रखना.

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म्यूचुअल फंड समीकरण में बदलाव

इस स्थिति में म्यूचुअल फंड काम आते हैं, ये आक्रामक टूल के तौर पर नहीं, बल्कि महंगाई से बचाने वाले शांत ज़रिया के तौर पर काम करते हैं. कंजर्वेटिव हाइब्रिड और इक्विटी सेविंग्स फंड, डेट की स्थिरता और सीमित इक्विटी एक्सपोज़र का मेल होते हैं. इनमें प्योर इक्विटी के मुकाबले कम उतार-चढ़ाव होता है और प्योर डिपॉज़िट के मुकाबले ज़्यादा ग्रोथ मिलती है.

50 लाख रूपये से हर महीने कितनी कमाई ?

जानकारी के मुताबिक, स्ट्रक्चर और मार्केट की परिस्थितियों के अनुसार, 50 लाख रुपये का फंड रखने वाला रिटायर व्यक्ति 5 प्रतिशत की निकासी दर पर सालाना करीब 2.5 लाख रुपये की इनकम पा सकता है, जो महीने में लगभग 20,800 रुपये के बराबर है. हालांकि,अगर राशि तरह तरह के इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में लगाया जाए, जिससे औसतन 7 से 8 प्रतिशत का पोर्टफोलियो रिटर्न मिले, तो हर महीने होने वाली इनकम बढ़कर करीब 25,000-35,000 रुपये हो सकती है.

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