Jardalu Mango Specialities: आम को फलों का राजा कहा जाता है. गर्मियों के सीजन के आते ही लोग हापुस, लंगड़ा, अल्फांसो जैसी तरह-तरह की भारतीय आम की मशहूर किस्मों का लुत्फ उठाने में लग जाते हैं. आज हम आपको आम की एक ऐसी वेराएटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी पहुंच बड़े-बड़े राजनेताओं व मशहूर हस्तियों तक है. यहां भागलपुर के मशहूर GI-टैग वाले जर्दालू आम की बात की जा रही है.

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देश के गणमान्य चखेंगे स्वाद

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्दालू आमों की 125 क्विंटल से ज्यादा की एक खेप देश के बड़े नेताओं को भेजी जा रही है. नमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, राज्यसभा चेयरमैन, मुख्यमंत्री और अन्य VVIP शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 1 जून को 'मन की बात' कार्यक्रम में इसकी तारीफ की थी, तब से मानो इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई. उन्होंने बताया था कि इस फल की खास खुशबू और मिठास को दूर से ही पहचाना जा सकता है. उन्होंने जर्दालू आमों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्थानीय उत्पाद सफलतापूर्वक ग्लोबल मार्केट तक पहुंच रहे हैं.

TOI की रिपोर्ट में बताया गया है कि  सुल्तानगंज ब्लॉक के महेशी-तिलकपुर गांव में मधुबन फार्म पर ताजे तोड़े गए जर्दालू आमों को प्लास्टिक के बक्सों में पैक किया जा रहा है. यहां से पहले इसे पटना के पास बिहटा के सिकंदरपुर में बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIADA) की फेसिलिटी पर भेजा जाता है. यहां कृषि विभाग के अधिकारी इसकी देखरेख करते हैं. यहां आमों की छंटाई और ग्रेडिंग की जाएगी और उन्हें 5-6 किलो वजन वाले गिफ्ट बॉक्स में पैक किया जाएगा. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन गिफ्ट पैक को दिल्ली स्थित बिहार भवन भेजा जाएगा, जहां से बिहार सरकार की ओर से इन्हें गणमान्य व्यक्तियों में बांटा जाएगा.

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2007 से चली आ रही परंपरा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे पहले साल 2007 में इस परंपरा की शुरुआत की थी. पहली बार जब उनके सामने जर्दालू आम पेश किया गया, तो वह इसके स्वाद के कायल हो गए. तब से बिहार सरकार द्वारा भागलपुर जिला प्रशासन और कृषि विभाग की देखरेख में हर साल जर्दालू आम नई दिल्ली स्थित बिहार भवन भेजे जाते हैं. इसका मकसद जी-आई टैग वाले जर्दालू आमों का प्रदर्शन शीर्ष स्तर पर करना है. जब देश के उच्च पदों पर बैठे गणमान्य व्यक्ति इसकी सराहना करते हैं, तो भागलपुर के स्थानीय किसानों को एक नई पहचान मिलती है. साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक इसे बड़े पैमाने पर पहुंचाने के रास्ते भी खुलते हैं.  

क्या होता है जीआई टैग?

जीआई टैग का पूरा नाम जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (Geographical Indication Tag) है. इसे एक तरह से आप कानूनी प्रमाण पत्र मान सकते हैं, जो किसी शहर या राज्य के किसी खास उत्पाद को दिया जाता है जैसे कि नागपुर के संतरे, दार्जिलिंग की चाय, भागलपुर का जर्दालू आम. यह ऐसे उत्पाद हैं, जिनकी गुणवत्ता उस जगह की मिट्टी, जलवायु पर निर्भर करते हैं. जिस वस्तु या उत्पाद को जीआई टैग मिला है, उसके नकली उत्पादों की बिक्री पर रोक लगती है. इससे उस भौगोलिक क्षेत्र विशेष के किसानों और छोटे उत्पादकों को लाभ मिलता है, उनकी कमाई बढ़ती है और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उनके उत्पादों का एक्सपोर्ट करना आसान होता है. 

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