RBI Cash Planning: देश में डिजिटल पेमेंट्स रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, लेकिन कैश की मांग कम होने के बजाय दहाई अंक की रफ्तार से बढ़ रही है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है कि कितने नए नोट छापने हैं और उन्हें देश के किस हिस्से में कब पहुंचाने हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि भारत में डिजिटल पेमेंट की ओर तेजी से बढ़ते झुकाव के बावजूद देश की फिजिकल करेंसी (नकदी) पर निर्भरता कम नहीं हुई है. करेंसी की मात्रा जिस दोहरे अंक की दर बढ़ रही है, उससे RBI के लिए भविष्य में नकदी की मांग का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
देश में मौजूदा समय में करीब 176 अरब नोट सर्कुलेशन में है. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक देश में टोटल करेंसी इन सर्कुलेशन बढ़कर 42.76 लाख करोड़ हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले 12.5% ज्यादा है. आरबीआई को हर साल 28 से 30 अरब नए नोट छापने पड़ते हैं, जबकि करीब 21 अरब पुराने या खराब हो चुके नोटों को चलन से बाहर कर दिया जाता है. मौजूदा ट्रेंड की वजह से RBI के लिए बैंकनोट के प्रोडक्शन, उन्हें बदलने और उनके डिस्ट्रीब्यूशन की क्षमता की प्लानिंग करना मुश्किल हो रहा है.
कैश की क्यों बढ़ रही डिमांड?
लोग भले ही रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए UPI का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन किसी भी आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभी भी बड़ी मात्रा में कैश अपने पास रखने का चलन बरकरार है. ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कम आय वाले समूहों, बुज़ुर्गों और छोटे व्यवसायों में आप ही नकदी को ही सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है क्योंकि ये अभी भी डिजिटल तकनीकों को अपनाने से कतराते हैं और नकद में लेनदेन में ही खुद को सहज पाते हैं.
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