पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत इन्वेस्टमेंट स्कीम के नियमों को और सख्त कर दिया है. इससे सब्सक्राइबर्स के लिए रिस्क लेवल और परफॉर्मेंस के हिसाब से स्कीम चुनना आसान हो जाएगा.

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28 अगस्त को जारी दो सर्कुलर के मुताबिक, PFRDA ने सभी पेंशन फंड्स को 30 दिनों के भीतर अपनी मौजूदा 'मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क' (MSF) का नाम बदलने और इक्विटी कैटेगरी वाली स्कीम को एक तय कैटेगरी में लाने के लिए 30 दिन का समय दिया है.

वहीं,अगर किसी फंड हाउस के पास एक ही कैटेगरी में दो से ज्यादा स्कीम हैं, उन्हें उन स्कीम को मर्ज करने, एक-दूसरे में मिलाने या रीस्ट्रक्चर करने के लिए 45 दिन का समय मिलेगा. इन सुधारों का मकसद  NPSको म्यूचुअल फंड की तरह ही मानकीकृत (Standardise) करना है, ताकि निवेशक अलग-अलग फंड के जोखिम और रिटर्न की सीधे तुलना कर सकें.

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इक्विटी-बेस्ड 5 नई कैटेगरीज

PFRDA ने MSF स्कीम के लिए उनके इक्विटी एलोकेशन के आधार पर एक स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन सिस्टम बनाया है, जिसका मकसद निवेशकों के लिए इक्विटी एक्सपोजर के लेवल और उससे जुड़े बड़े रिस्क को समझना आसान बनाना है. कौन-कौन सी हैं 5 नई कैटेगरीज:-

लाइफसाइकिल-बेस्ड स्कीम्स- उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट का एलोकेशन खुद बदलने वाली स्कीम्स.

एक्टिव चॉइस- जहां सब्सक्राइबर खुद तय करते हैं कि उनका पैसा इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड (C) या सरकारी प्रतिभूतियों (G) में कितना जाएगा.

NPS संचय- असंगठित क्षेत्र के लिए पहले से तय निवेश पैटर्न वाली स्कीम.

मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF)- पेंशन फंड्स द्वारा जारी की जाने वाली कस्टमाइज्ड स्कीम्स. इन्हें अब A से E तक की 5 नई श्रेणियों में इक्विटी एक्सपोजर (Equity exposure) के आधार पर बांटा जाएगा.

4A स्कीम्स- विशेष थीम पर आधारित स्कीम्स जैसे कि NPS वात्सल्य (NPS Vatsalya) और NPS MSME. 

यह उन सब्सक्राइबर्स के लिए खास तौर पर अहम है जो अपनी रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर NPS स्कीम चुनते हैं. नए स्ट्रक्चर से अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीम की तुलना करना आसान होगा.

बदल जाएंगे स्कीम्स के नाम

चूंकि PFRDA ने 28 अगस्त 2026 के सर्कुलर से 30 दिनों की सख्त समयसीमा दी है इसलिए सितंबर 2026 के अंत तक सब्सक्राइबर्स को अपने CRA (Protean/NSDL, KFintech, CAMS) पोर्टल या NPS ऐप पर निम्नलिखित बदलाव दिखाई देंगे:-

पुराने नामों का बदलना- आपकी मौजूदा MSF स्कीमों के नाम अचानक बदल जाएंगे, लेकिन इससे आपका निवेशित पैसा सुरक्षित रहेगा.

रीस्ट्रक्चरिंग और रीक्लासिफिकेशन- जिन पुरानी स्कीम्स में एक साथ कई अलग-अलग इक्विटी मैंडेट (मल्टी-कैप या मिक्स्ड एसेट) शामिल थे, उन्हें फंड हाउस द्वारा तोड़कर या रीस्ट्रक्चर करके तय की गई A से E तक की सटीक श्रेणियों में ढाला जाएगा.

मर्जर से क्या है जोखिम?

PFRDA ने पेंशन फंड द्वारा पेश की जा सकने वाली MSF स्कीमों की संख्या पर भी रोक लगाई है. कोई फंड हर टियर (Tier) के लिए हर कैटेगरी में अपनी मर्जी से ज्यादा से ज्यादा दो स्कीमें पेश कर सकता है. अगर किसी फंड के पास पहले से ही किसी कैटेगरी में दो से ज्यादा स्कीमें हैं, तो उसे 45 दिनों के भीतर अतिरिक्त स्कीमों को मर्ज करना होगा. सब्सक्राइबर्स को इसकी जानकारी देनी होगी और स्कीम को बंद करने के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. 

इस नियम के तहत, अगर आपके पेंशन फंड मैनेजर के पास एक जैसी दो स्कीम्स थीं, तो वे अब किसी एक में ही मर्ज हो जाएंगी. इसका मतलब है कि आपकी चुनी हुई मूल स्कीम का वजूद पूरी तरह खत्म हो सकता है. वहीं, नई मर्ज की गई स्कीम का निवेश पैटर्न आपकी पुरानी स्कीम से अलग हो सकता है. हो सकता है उसमें इक्विटी (शेयर बाजार) का हिस्सा कम या ज्यादा हो, जिससे आपका रिस्क प्रोफाइल बदल जाएगा.

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