Pakistan Seeks Help from America: पाकिस्तान की आर्थिक हालत अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है. विदेशी मुद्रा की स्थिति मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा मांगी है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इसकी पुष्टि की है. उनके मुताबिक, इसको लेकर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन अभी कोई समझौता नहीं हुआ है.

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क्यों पड़ी पैसों की जरूरत?पाकिस्तान लंबे समय से डॉलर की कमी और विदेशी भुगतान के दबाव से जूझता रहा है. देश को अपने आयात और दूसरे बाहरी खर्चों के लिए लगातार विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सरकार चाहती है कि उसके पास पर्याप्त डॉलर का भंडार रहे और पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम हो. पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने साफ किया है कि अमेरिका से मांगी गई ये सुविधा सामान्य कर्ज या क्रेडिट लाइन की तरह नहीं है. इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में भरोसा बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को यह संदेश देना है कि पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पहले से ज्यादा स्थिर हो रही है.

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बार-बार दोस्तों से मदद लेता है पाकिस्तानपाकिस्तान को आर्थिक संकट के समय चीन, सऊदी अरब और दूसरे मित्र देशों से कर्ज, जमा राशि और वित्तीय मदद मिलती रही है. सरकार अब इस मॉडल पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है. औरंगजेब के मुताबिक, पाकिस्तान की कोशिश है कि वह छोटी अवधि के लिए मिलने वाली मदद और बार-बार होने वाले कर्ज रोलओवर पर कम निर्भर रहे. इसके बजाय वह लंबे समय के लिए बाजार से पैसा जुटाने की स्थिति में आए.

IMF के कर्ज कार्यक्रम पर भी निर्भरतापाकिस्तान इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम को लागू कर रहा है. ये मदद 2024 में मंजूर हुई थी. IMF के साथ कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था में कई सुधार करने हैं. पाकिस्तान 2023 में डिफॉल्ट के काफी करीब पहुंच गया था. उस समय IMF और दूसरे देशों की मदद से उसे तत्काल राहत मिली थी. अब सरकार की कोशिश है कि दोबारा ऐसी स्थिति न बने और देश की क्रेडिट रेटिंग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बेहतर हो.

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अमेरिका से मदद मिली तो क्या होगा?अगर अमेरिका से ये सुविधा मंजूर होती है तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिल सकता है. इससे रुपये पर दबाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार से पैसा जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है. फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि 10 अरब डॉलर की मांग रखी गई है, लेकिन अमेरिका ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है. पाकिस्तान को आगे की बातचीत और अमेरिकी फैसले का इंतजार है.