टाटा समूह में आंतरिक मतभेद का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है और इसमें ताजा अपडेट सामने आया हैं. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने अब टाटा संस की रीस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने ये भी कहा कि टाटा संस की रीस्ट्रक्चरिंग के साथ ही होल्डिंग कंपनी को अलग-अलग एंटीटी में बांट दिया जाए. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया है कि होल्डिंग कंपनी को अनलिस्टेड ही रहना चाहिए. 

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हालांकि नोएल टाटा के इस प्रस्ताव से RBI के कंप्लाइंस नियमों, SP ग्रुप के बाहर निकलने के रास्ते और टाटा ग्रुप में कैपिटल फ्लो को लेकर चल रही आंतरिक बहस और बढ़ गई है. दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस की रजिस्ट्रेशन अर्जी को सरेंडर खारिज कर दिया है. 

क्या है इस नए प्रस्ताव का मतलब?

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने होल्डिंग कंपनी टाटा संस को लिस्ट करने के बजाय इसको कई सब्सिडियरीज में बांटने की सिफारिश की है. साथ ही रीस्ट्रक्चरिंग की संभावना तलाशने का प्रस्ताव रखा है. उनके मुताबिक आरबीआई की तरफ से तय की गई रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए ये जरूरी है.

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रीस्ट्रक्चरिंग अलग-अलग तरीकों से सामने आ सकती है, जिसमें एक डीमर्जर शामिल है. इसके अलावा इसमें मूविंग ऐसेट्स को सब्सिडियरीज में शामिल करने को लेकर भी चर्चा जरूरी है. टाटा संस और इसके विशाल कारोबारी पोर्टफोलियो को देखते हुए ये माना जा सकता है कि इस तरह की रीस्ट्रक्चरिंग में काफी ज्यादा रेगुलेटरी-कमर्शियल के साथ ही टैक्स असमानताएं सामने आ सकती हैं.

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव को 17 सितंबर को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में रखा गया. बोर्ड मीटिंग में रखे गए प्रस्ताव के बारे में जानने वालों से ये जानकारी मिली है, हालांकि बोर्ड इस प्रस्ताव पर विचार करेगा या नहीं ये तुरंत पता नहीं चल पाया है.

टाटा संस (Tata Sons) टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग और निवेश कंपनी और मेजोरिटी शेयरहोल्डर है. टाटा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के नियंत्रण और मैनेजमेंट करने वाली मुख्य कंपनी है.

विवाद कब ज्यादा गंभीर हुआ?

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच जो विवाद हैं, उसके पीछे टाटा संस के स्वामित्व का मामला अहम माना जा सकता है. हाल ही में टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति करते हुए उन्हें पांच साल के लिए कार्यकारी चेयरमैन (Executive Chairman) बनाने का फैसला किया है. 

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की इस दोबारा नियुक्ति का विरोध करते हुए इसे गैरकानूनी बताया. उनका तर्क है कि टाटा संस के नियमों के अनुसार ट्रस्ट की सहमति अनिवार्य है. टाटा संस ट्रस्ट की होल्डिंग कंपनी है जो कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कैपिटल, टाटा कम्यूनिकेशंस, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अग्रटास शामिल हैं. टाटा संस की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है. 

दूसरे शब्दों में कहें तो टाटा विवाद मुख्य रूप से टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच नेतृत्व और कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग (IPO) को लेकर चल रहे मतभेद का नतीजा है.

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